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स्कूलों के नजदीक 72 फीसदी दुकानों पर बिक रहा तंबाकू, सर्वे में सामने आया सच

Tue, 26 Jan 2021 01:24 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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देश के 25 शहरों में स्कूल-कॉलेजों के आसपास की 72 फीसदी दुकानों पर तंबाकू उत्पादों की खुलेआम बिक्री हो रही है। एक हालिया अध्ययन में सामने आया कि इन दुकानों पर सिगरेट, बीड़ी और गुटखा, खैनी जैसे तंबाकू उत्पादों को चॉकलेट, कैंडी आदि के करीब बच्चों की नजर के दायरे पर ही लगाया जाता है ताकि वे इन्हें खरीदने के लिए प्रेरित हो सकें।

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स्कूलों के करीब तंबाकू उत्पादों की खुलेआम बिक्री के ज्यादा सबूत जुटाने के लिए अक्टूबर से नवंबर 2019 के बीच ‘बिग टोबैको टिनी टार्गेट’ अध्ययन किया। इस अध्ययन का मकसद यह उजागर करना भी कि कैसे सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 में सेल प्वाइंट पर विज्ञापन लगाने व तंबाकू उत्पाद डिस्प्ले करने की इजाजत देने वाली अहम खामी मौजूद है। साथ ही यह भी बताना था कि इस अहम खामी का लाभ उठाकर ही तंबाकू कंपनियां युवाओं और बच्चों को अपना निशाना बनाती हैं।

दो लोक स्वास्थ्य समूहों ‘वॉलेंट्री हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ और ‘कंज्यूमर वॉइस’ ने इस सर्वे में एक मोबाइल एप का इस्तेमाल किया। अध्ययन में 10 राज्यों के 25 शहरों के कुल 1011 शैक्षणिक संस्थानों को शामिल किया गया। सर्वेक्षण में कहा गया कि शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के भीतर तंबाकू उत्पादों की बिक्री करने वाले 885 स्थानों की पहचान की गयी। यह सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद कानून (कोटपा), 2003 की धारा छह (बी) का उल्लंघन है। इस कानून के तहत शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के भीतर के क्षेत्र में सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध है।
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रिपोर्ट में कहा गया,कुल 885 स्थानों की जांच की गई। इनमें 640 स्थानों पर (72.32 प्रतिशत) कैंडी, चॉकलेट जैसे उत्पादों के पास ही सिगरेट रखी गई थीं, जबकि 669 (75.59 फीसदी) स्थानों पर तंबाकू उत्पादों को भी उन जगहों पर रखा गया था, जो बच्चों को आसानी से दिखते हैं। 117 (13.2 फीसदी) बिक्री केंद्रों पर बाहर भी इन उत्पादों का विज्ञान किया गया था, जबकि 369 (41.69 फीसदी) जगहों पर तंबाकू उत्पादों के पोस्टर लगाते थे। इनमें भी 107 (12.09) स्कूलों के पास बडे़ बैनर लगा रखे थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि तंबाकू उत्पादों का विज्ञापन करना कोटपा की धारा 5(2) और जीएसआर 345 (ई) अधिसूचना का उल्लंघन है।

वॉलेंट्री हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ की मुख्य कार्यकारी अधिकारी भावना बी. मुखोपाध्याय ने कहा, स्कूल-कॉलेजों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री और विज्ञापन के लिए तंबाकू उद्योग जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, हमारे शैक्षणिक संस्थान सुरक्षित नहीं रहे, क्योंकि तंबाकू उद्योग हमारे बच्चों और युवाओं को अपने जानलेवा उत्पादों के इस्तेमाल के लिए लुभा रहे हैं। कंज्यूमर वॉइस’ के मुख्य परिचालन अधिकारी आशिम सान्याल ने कहा कि तंबाकू कंपनियां शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री कर कानून की खामियों का फायदा उठा रही है और युवा पीढ़ी की जान को खतरे में डाल रही है।

कानून तोड़कर तंबाकू उत्पादों पर दे रहे ऑफर
रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन 885 दुकानों की जांच की गई, उनमें से 111 (12.54 फीसदी) अपने प्रमोशन के लिए तंबाकू उत्पादों का मुफ्त वितरण कराया। 106 (11.98 फीसदी) मरीजों को स्पेशल या लिमिटेड एडिशन पैक दिए गए, जबकि 105 (11.86 फीसदी) दुकानों में तंबाकू उत्पादों पर मूल्य छूट का भी प्रस्ताव देक लुभाया जा रहा है। बता दें कि कोटपा की धारा 5(3) के तहत डिस्काउंट के जरिये किसी भी तंबाकू उत्पाद का वितरण और प्रमोशन करना प्रतिबंधित है।

देश की जीडीपी के एक फीसदी हिस्से का तंबाकू खा रहे भारतीय
वैश्विक युवा तंबाकू सर्वे के मुताबिक, भारत में 13 से 15 साल की उम्र के बीच के छात्रों में से 14.6 फीसदी तंबाकू उत्पाद खा रहे हैं। पुरुष छात्रों में 11 फीसदी और महिला छात्रों में छह फीसदी ने धुआंरहित तंबाकू पदार्थों का उपयोग किया है। सर्वे के मुताबिक, अकेले 2017-18 में देश में करीब 17, 77,341 करोड़ रुपये के बराबर तंबाकू उत्पाद बेचे गए थे, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 1 फीसदी हिस्सा है।

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