सीपीआई (माओवादी) के पूर्व नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू भूपति ने जंगलों में सक्रिय माओवादी कार्यकर्ताओं से हथियार डालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उन्हें वास्तविकता को समझना होगा और रूढ़ियों में फंसे नहीं रहना चाहिए। अपनी असफलताओं को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि सशस्त्र संघर्ष में शामिल लोगों के लिए मुख्यधारा में लौटने और जनता के बीच काम करने का समय आ गया है।
15 अक्टूबर, 2025 को प्रतिबंधित पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) के 60 सदस्यों के साथ सोनू भपति ने आत्मसमर्पण किया था। उन्होंने एएनआई से बातचीत में कहा कि बदलती जमीनी परिस्थितियों ने निरंतर सशस्त्र संघर्ष को अव्यावहारिक बना दिया है और बचे हुए नक्सलियों से भी इसी मार्ग का अनुसरण करने का आग्रह किया।
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'हम असफल रहे और आखिर में आत्मसमर्पण करना पड़ा'
उन्होंने कहा, 'मैंने 28 साल तक केंद्रीय समिति के सदस्य के रूप में और 18 साल तक पोलित ब्यूरो के सदस्य के रूप में काम किया। एक सिद्धांत है, अपने दुश्मन को जानो और खुद को जानो। हम दोनों मामलों में असफल रहे और इसीलिए हमें अंततः यह कदम उठाना पड़ा।'
सोनू भूपति पर 60 लाख रुपये का इनाम था। उनके दूसरे कमांडर प्रभाकरन शुरू में आत्मसमर्पण दल का हिस्सा थे, लेकिन कथित तौर पर यात्रा के अंतिम चरण में चार महिला गुरिल्लाओं के साथ जंगलों में गायब हो गए। अधिकारियों ने आत्मसमर्पण को आतंक विरोधी अभियानों में एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया और कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के लिए पुनर्वास के उपाय किए जाएंगे।
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हमने भारत को कमजोर आंकने की गलती की, खुद को मजबूत माना'
सोनू भूपति ने आत्मसमर्पण को लेकर कहा, 'यह एक दिन का फैसला नहीं था। मैं वर्षों से पार्टी के कामकाज का अवलोकन कर रहा था और अपनी गलतियों पर विचार कर रहा था।' उन्होंने बताया कि नेतृत्व संरचना का हिस्सा रहते हुए करीब 2003 में उनके लिए वैचारिक मतभेद उभरने लगे थे। उन्होंने कहा कि मैंने बार-बार अपने विचार रखे, लेकिन संगठन दिशा बदलने में विफल रहा।
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रणनीतिक विफलताओं को स्वीकार करते हुए सोनू भूपति ने कहा कि माओवादी आंदोलन ने भारतीय राज्य और अपनी क्षमताओं दोनों को गलत समझा, और संगठन ने अपनी सशस्त्र शक्ति को अधिक और भारत को कम आंका। उनके अनुसार, इस गलत अनुमान ने समय के साथ आंदोलन को कमजोर कर दिया और उसे पतन की ओर धकेल दिया।
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