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उज्बेकिस्तान की महिला 32 साल बाद बैठने में सफल, भारत में हुई सर्जरी

Fri, 06 Jul 2018 01:25 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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उज्बेकिस्तान की रहने वाली गुलनोरा रपिखोवा (37) की बुधवार को दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में सफल सर्जरी हुई है। अब वह 32 साल बाद बैठने में सफल हुई हैं। बचपन में उनके शरीक का नीचे का हिस्सा बुरी तरह जल गया था। कई जगह इलाज कराने के बाद उन्होंने भारत का रुख किया। इस सफल सर्जरी में उनके पुराने जलने के घाव ठीक किए गए।

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उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद स्थित सिरदरिया की रहने वाली गुलनोरा का कहना है कि इतने सालों बाद बैठकर वह बहुत खुश हैं, लेकिन उन्हें बैठने में थोड़ा डर लग रहा है। गुलनोरा उस वक्त पांच साल की थीं जब घर में स्टोव जलाते वक्त उनके कपड़ों में आग लग गई। उस वक्त वह घर पर अकेली थीं। वह रोते हुए वह अपनी मां के पास गईं, उन्हें फिर अस्पताल ले जाया गया। उनके शरीर के पिछले हिस्से में जांघों के नीचे का भाग काफी जल गया था।

जिसके बाद वह 18 महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहीं। पहले तो उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहां वह 6 महीने तक रहीं। इसके बाद वह ताशकंद के एक अस्पताल में करीब एक साल तक रहीं। उस दौरान उनकी पांच सर्जरी हुईं लेकिन उसके बाद भी उनके घाव नहीं भरे। उन्होंने अपने जीवन के 32 साल खड़े होकर और लेटकर गुजारे।
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उनका कहना है कि 'मेरे लिए वह सब काफी मुश्किल था, लेकिन मुझे जीना था। मैं आठ साल की उम्र में स्कूल गई और मैंने अपनी पढ़ाई खड़े होकर और लेटकर की। इस दर्द को झेलने के लिए मैंने खुद का तरीका अपनाया। इसके लिए मैं एक साफ तौलिये को अपने कपड़ों के नीचे, घावों के ऊपर लगाती थी।' गुलमोरा ने आगे कहा कि 'वह सब मेरे लिए काफी दर्दनाक था, जिसके लिए मुझे पेनकिलर का सहारा लेना पड़ता था। बस मैं यही सब कर सकती थी।'

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सितंबर में दोबारा आएंगी भारत

गुलमोरा का जीवन 6 महीने पहले बदला जब वह अपोलो डॉक्टरों द्वारा सिरमोरा में लगाए गए मेडिकल कैंप में गईं। उन्होंने कहा कि इसके कुछ दिनों बाद उन्हें भारत से डॉक्टों का फोन आया। जिसके बाद वह एक दुभाषिया की मदद से 26 मई को भारत आईं। गुलमोरा के माता पिता की एक छोटी सी दुकान है। भारत आने का उनका सारा खर्च ताशकंद के एक समाज सेवी ने उठाया। जिसके बाद 31 जून को उनकी सर्जरी हुई जिसमें महज 2 घंटे का समय लगा।

इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल की डॉक्टर शाहीन नूरेजहां का कहना है कि गुलमोरा दुभाषिया के साथ क्लीनिक आईं तो उन्होंने उसे बैठने को कहा। लेकिन उसने मना कर दिया। वह पिछले 32 सालों से नहीं बैठी थीं।

नूरेजहां ने कहा कि जब उन्होंने उसके घाव देखे तो वह हैरान थीं कि कोई इतने बड़े घावों के साथ कैसे जीवित रह सकता है। यह सर्जरी ज्यादा जटिल नहीं थी। अब उनके घाव भरने शुरू हो गए हैं और अगले 6 महीनों बाद वह टाइट कपड़े भी पहन पाएंगी। अब उन्हें सितंबर को दोबारा बुलाया गया है ताकि उनके घावों में आए सुधार को देखा जा सके।
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