आसाम- 2 की मौत
8 जून 2018 स्थान- पंजुरी कचारी गांव, कार्बी अंगलोंग
पीड़ित- 30 साल के अभीजित नाथ और 29 साल के निलोत्पल दास। दोनों ही गुवाहाटी के रहने वाले थे उन्हें शाम के 7.30 बजे 500 लोगों की भीड़ ने बच्चा चोर होने के शक में पीट-पीटकर मार दिया। नाथ जहां गुवाहाटी के ठेकेदार तो वहीं दास गोवा में साउंड इंजीनियर थे। नाथ अपने काम से बाहर गए थे और उन्होंने दोस्त को साथ चलने के लिए कहा। घटनास्थल से 18 किलोमीटर की दूरी पर पुलिस स्टेशन था। पुलिस रात के 9.10 बजे मौके पर पहुंची।
अफवाह- एक हफ्ते पहले से ही फेसबुक पोस्ट और एक-दूसरे के जरिए यह अफवाह फैलाई गई कि क्षेत्र में बच्चा चोर घूम रहे हैं।
पश्चिम बंगाल- 2 मौत
13 जून 2018 स्थान- बुलबुलचंडी-दुबापारा गांव, माल्दा
पीड़ित- 30 साल के मानसिक बीमार शख्स को 60 लोगों की भीड़ ने हत्या कर दी। घटनास्थल से 8 किलोमीटर की दूरी पर पुलिस स्टेशन था जो 30 मिनट बाद मौके पर पहुंची।
23 जून, स्थान- माथुरी, पूर्वी मिदनापुर
पीड़ित- 36 साल के बीकॉम ग्रैजुएट संजय चंद्रा काम देने वाले एक शख्स से मिलने के लिए आए थे। गर्मी की वजह से उन्होंने अपना चेहरा ढंका हुआ था। स्थानीय लोगों ने उन्हें एक नाबालिग लड़की के साथ बात करते हुए देखा और उन्हें शक हुआ। जल्द ही 1000 लोगों की भीड़ ने उनपर हमला कर दिया। घटनास्थल से 8 किलोमीटर की दूरी पर पुलिस स्टेशन था और 2-3 पुलिसवाले चेकपोस्ट पर कुछ ही मिनटों में पहुंच गए।
अफवाह- दोनों ही क्षेत्रों में बच्चा चोरी की अफवाहें फैली थीं। खासतौर से जुबानी तौर पर।
छत्तीसगढ़- 1 मौत
22 जून स्थान- मंद्रकला गांव, सरगुजा
पीड़ित- एक अज्ञात शख्स, पुलिस के अनुसार वह मानसिक विकलांग था। उसे 15 लोगों ने इसलिए मार दिया क्योंकि वह अपनी निर्दोषता को साबित नहीं कर पाया था। घटनास्थल से 12 किलोमीटर की दूरी पर पुलिस स्टेशन था। पुलिस को हमले की सूचना दी गई लेकिन कोई भी समय पर नहीं पहुंचा।
अफवाह- बच्चा चोरी करने वाले गैंग की खबरें फैलाई जा रही थीं। दो महीने पहले पड़ोस के अंबिकापुक जिले से कुछ बच्चों को चुराया गया था। जिसके बाद इन अफवाहों को बल मिला। बहुत से वायरल मैसेज में कहा जा रहा था कि 500 लोगों की एक टीम छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में बच्चों को अगवा करके उनकी किडनी निकाल रही है।
त्रिपुरा- 3 मौत
28 जून स्थान- सिधाई मोहनपुर, पश्चिमी त्रिपुरा
पीड़ित- 30 साल के जहीर खान जोकि एक रेहड़ीवाले थे उन्हें 1000 लोगों की भीड़ ने मार दिया। वह अपने तीन साथियों के साथ माल बेचने के लिए वैन से यात्रा कर रहे थे तभी भीड़ ने हमला कर दिया। घटनास्थल से 8-10 किलोमीटर की दूरी पर पुलिस स्टेशन था। चारों ने त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के स्थानीय कैंप में शरण ली। जिसके बाद पुलिस ने हवा में फायरिंग की लेकिन लोगों की संख्या ज्यादा थी।
स्थान- कलाच्चारा, दक्षिण त्रिपुरा
पीड़ित- 33 साल की सुकंता चक्रवर्ती एक एनाउंसर थी जिन्हें कि जागरुकता फैलाने के लिए अधिकारियों ने नौकरी पर रखा था। उन्हें दोपहर के तीन बजे 2000 लोगों की भीड़ ने बाजार में मार दिया। घटनास्थल से 8-10 किलोमीटर की दूरी पर पुलिस स्टेशन था। कुछ पुलिसवाले घटनास्थल पर मौजूद थे लेकिन लोगों की संख्या ज्यादा थी।
स्थान- लक्ष्मीबिल गांव, सिपाहिजाला
पीड़ित- एक अज्ञात महिला थी उन्हें और एक महिला पर भीड़ ने हमला कर दिया। घटनास्थल से 5-6 किलोमीटर की दूरी पर पुलिस स्टेशन था।
अफवाह- इस घटना के पीछे एक अफवाह था जिसे कि सोशल मीडिया और जुबान के जरिए फैलाया जा रहा था। इसकी शुरुआत 11 साल के एक बच्चे का शव मोहनपुरा क्षेत्र में मिलने के बाद हुई थी जिसपर कटे हुए के निशान थे। इन निशानों की वजह से खबर फैल गई कि बच्चे की किडनी निकाली गई है जोकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आधारहीन साबित हुईं।
महाराष्ट्र- 9 मौत
1 जुलाई 2018, स्थान- राईनपाडा, धुले
पीड़ित- 36 साल के दादाराव भोसले और उनके 45 साल के भाई भरत, 45 साल के भरत माल्वे, 20 साल की आगनू श्रीमत इंगोले और 47 साल के राजू भोसले। पांचों एक ही परिवार के और खानाबदोश गोसावी समुदाय से ताल्लुक रखते थे। उन्हें 3,500 लोगों की भीड़ ने मार दिया। घटनास्थल से 20 किलोमीटर की दूरी पर आउटपोस्ट था जबकि 40 किलोमीटर की दूरी पर पिमपल्नेर स्टेशन था। पिमपल्नेर थाने में सुबह 11.10 बजे फोन किया गया और 12.15 पर पुलिस मौके पर पहुंची।
अफवाह- सोशल मीडिया के जरिए कई तरह की अफवाहें फैलाई जा रही थी। जिसमें दो 40 सेकेंड का वीडिया भी था जिसमें लाइन से बच्चों के क्षत-विक्षत शव दिखाए जा रहे थे। वीडियो के वॉयस ओवर में कहा जा रहा था कि इनका अपहरण किया गया है। दूसरे वीडियो में हिजाब पहनी महिला दिखाई गई थी जिसमें कहा गया था कि इस तरह की महिलाएं बच्चों का अपहरण कर रही हैं। इसी तरह की अफवाह में चार और लोगों को महाराष्ट्र में भीड़ ने पिछले महीने मार दिया। अफवाह की वजह से औरंगाबाद में 3 और गोंदिया में एक की मौत हो गई। इस घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने फैसला लिया है कि वह व्हाट्सएप ग्रुप की निगरानी करेगी। ग्रुप में पुलिसकर्मियों को भी शामिल किया जाएगा।
व्हाट्सएप मैसेज का प्रभाव
व्हाट्सएप पर भेजे जा रहे संदेश कौन भेजता है, कहां से आते हैं इसका पता किसी को नहीं होता है। मगर जब बात बच्चों की सुरक्षा की आती है तो कोई भी इस बात की पुष्टि नहीं करता कि यह सच है या झूठ। व्हाट्सएप पर जंगल की आग की तरह अफवाहें फैलाई जाती हैं। इसके कारण एक राज्य के लोगों को दूसरे राज्य के नागरिकों के खिलाफ भड़काने का काम भी हो रहा है।
पढ़े-लिखे 40 प्रतिशत युवा भी नहीं परखते सच्चाई
यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के एक शोध के अनुसार 40 प्रतिशत पढ़-लिखे युवा किसी खबर की सच्चाई की जांच नहीं करते हैं। यदि उन्हें कोई खबर या वीडियो गलत लगती है तो भी केवल 45 प्रतिशत युवा ही सच्चाई की जांच करने की जहमत उठाते हैं।
इन बातों का रखें ख्याल
1. यदि आपके पास बच्चा चोरी, अंग निकालने वाले किसी गिरोह आदि का कोई संदेश या वीडियो आते है तो बिना सोचे-समझे उसे आगे फॉरवर्ड ना करें।
2. व्हाट्सएप को नफरत फैलाने का जरिया ना बनाएं।
3. भड़काऊ या उकसाने वाले संदेशों की सत्यता की जांच किए बगैर उन्हें प्रसारित करने से बचें।