कर्ज संकट में फंसी जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) के अधिकरण के लिए मुंबई के सुरक्षा समूह को वित्तीय ऋणदाताओं और घर खरीदारों ने मंजूरी दे दी। इस कदम से नोएडा, ग्रेटर नोएडा में सालों से अपने फ्लैट मिलने का इंतजार कर रहे करीब 20,000 घर खरीदारों को बड़ी राहत मिली है और अब उन्हें अपना फ्लैट मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। सरकारी क्षेत्र की कंपनी एनबीसीसी भी अधिग्रहण की दौड़ में थी।
दोनों कंपनियों के अधिग्रहण प्रस्ताव पर दस दिन तक चली मतदान प्रक्रिया बुधवार दोपहर को खत्म हुई। इसमें 98 फीसदी से अधिक मत सुरक्षा समूह की बोली के पक्ष में पड़े हैं। जेआईएल के अधिग्रहण के लिए यह बोली प्रक्रिया का चौथा दौर था। जेआईएल अगस्त 2017 से कंपनी दिवाला समाधान प्रक्रिया से गुजर रही है।
जेआईएल के अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) अनुज जैन ने कहा कि सुरक्षा समूह 98.66 प्रतिशत मतों के समर्थन के साथ बोली में सफल हुई। उसे एनबीसीसी से मात्र 0.12 फीसदी अधिक मत हासिल हुए।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा के 20,000 घर खरीदारों के लिए बड़ी राहत, सरकारी कंपनी एनबीसीसी भी थी दौड़ में
12 बैंकों और 20,000 घर खरीदारों को कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) में मतदान का अधिकार मिला था। इसमें घर खरीदारों का मताधिकार 56.63 फीसदी और क्रेडिटर्स का 43.25 फीसदी था। फिक्स्ड डिपॉजिट धारकों के पास 0.13 फीसदी मताधिकार था।
ऋणदाताओं ने 9783 करोड़ का दावा किया है। अधिग्रहण की बोली की स्वीकृति के लिए कम से कम 66 फीसदी वोटों की जरूरत थी। सीओसी की मंजूरी के बाद सुरक्षा समूह के प्रस्ताव को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल से भी स्वीकृति मिली थी। सुरक्षा समूह ने बैंकरों को 2500 एकड़ से अधिक जमीन और गैर परिवर्तनीय ऋणपत्र के जरिए 1300 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया था।