सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को साफ किया कि उद्योगपति विजय माल्या शीर्ष अदालत में लंबित मामले को लंदन की अदालत में दिवालियापन कार्रवाई टालने का आधार नहीं बना सकते। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट में माल्या की वह याचिका लंबित है जिसमें उन्होंने 9000 करोड़ रुपये बकाये को समझौता करने की पेशकश की है।
वास्तव में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष कहा कि माल्या लंदन की अदालत में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा शुरू की गई दिवालियापन की कार्यवाही पर फैसला टालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले को आधार बना रहे हैं।
लंबित मामलों का हवाला देकर बच नहीं सकते माल्या: सुप्रीम कोर्ट
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि माल्या द्वारा बकाये रकम को वापस करने की पेशकश करने का मामला लंबित है लेकिन उन्होंने अब तक एक रुपया नहीं चुकाया है। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि माल्या विश्व के किसी भी जगह पर चल रही अदालती कार्रवाई को टालने के लिए भारत के शीर्ष अदालत में लंबित मामले को आधार नहीं बना सकते। पीठ ने माल्या व उनकी कंपनी की याचिका पर शुक्रवार को विचार करने का निर्णय लिया है।
माल्या ने बांबे हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है जिसमें प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उनकी दागरहित संपत्तियों के जब्त करने की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था। विशेष अदालत ने गत जनवरी में माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था। माल्या पर 17 बैंकों का करीब 9000 करोड़ रुपये बकाया है।