उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई को यौन उत्पीड़न के ‘मनगढ़ंत और फर्जी मामले में फंसाने’ का प्रयास करने वाले कथित षड्यंत्र के मामले में सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर उचित समय पर सुनवाई होगी। मामला तुरंत सूचीबद्ध करने के लिए न्यायमूर्ति एस. ए. बोबड़े और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की पीठ के समक्ष रखा गया था।
इसपर पीठ ने याचिकाकर्ता वकील एम. एल. शर्मा से सवाल किया, ‘इतनी जल्दीबाजी क्या है? आपने मामला दायर कर दिया है, वह सुनवाई के लिए आएगा।’ उसे उचित समय पर सूचीबद्ध किया जाएगा। शर्मा ने शुरुआत में अदालत से कहा कि उनकी अर्जी पर आठ मई को सुनवाई की जाए। बाद में उन्होंने पीठ से कहा कि वह मामले पर तुरंत सुनवाई की मांग नहीं कर रहे हैं।
शर्मा ने जब कहा कि उनकी अर्जी भी उसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की जाए जिसने सीजेआई को फंसाने के लिए षड्यंत्र रचे जाने का आरोप लगाने वाले वकील के हलफनामे पर सुनवाई की थी तो न्यायमूर्ति बोबड़े ने कहा, ‘हम देखेंगे कि यह कब सूचीबद्ध होता है और किसके समक्ष होता है।’