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सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को दी गोरक्षा, लिंचिंग मामलों में आदेश का अनुपालन करने पर चेतावनी

Fri, 07 Sep 2018 03:38 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को इस बात पर नाराजगी जताई की 29 राज्यों तथा सात केंद्र शासित प्रदेशों में से केवल 11 ने भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या और गोरक्षा के नाम पर हिंसा जैसे मामलों में कदम उठाने के शीर्ष अदालत के आदेश के अनुपालन के बारे में रिपोर्ट पेश की है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर तथा न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने ऐसा नहीं करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रिपोर्ट पेश करने का अंतिम अवसर देते हुए चेतावनी दी कि यदि उन्होंने एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश नहीं की तो उनके गृह सचिवों को न्यायालय में व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होना पड़ेगा। 

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इस मामले की सुनवाई के दौरान, केंद्र ने पीठ को सूचित किया कि गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा के मुद्द पर न्यायालय के फैसले के बाद भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने के बारे में कानून बनाने पर विचार के लिए मंत्रियों के समूह का गठन किया गया है। न्यायालय कांग्रेस के नेता तहसीन पूनावाला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। 

याचिका में राजस्थान में 20 जुलाई को डेयरी किसान रकबर खान की कथित तौर पर पीट-पीटकर हुई हत्या के मामले में शीर्ष अदालत के फैसले के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए प्रदेश के पुलिस प्रमुख, मुख्य सचिव समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई करने की मांग की गई थी।
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शीर्ष अदालत ने 17 जुलाई को कहा था कि ’’ भीड़तंत्र की भयावह हरकतों’’ को कानून पर हावी नहीं होने दिया जा सकता। इसके साथ ही गोरक्षा के नाम पर हिंसा और भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या के मामलों में कई दिशा-निर्देश जारी किए थे। न्यायालय ने सरकार से कहा था कि इस तरह की घटनाओं से सख्ती से निबटने के लिये वह नया कानून बनाने पर विचार करे। (इनपुट, भाषा)

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