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'फरिश्ते दिल्ली के' योजना: दिल्ली सरकार को सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी, कहा- गुमराह किया तो लगाएंगे भारी जुर्माना

Sat, 06 Jan 2024 04:51 AM IST
गुलाम अहमद अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

फरिश्ते दिल्ली के...योजना के तहत कोई भी शख्स अगर सड़क हादसे में घायल होता है, तो उसे निजी अस्पताल में इलाज की सुविधा मिलती है। इसका पूरा खर्चा सरकार उठाती है।  
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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'फरिश्ते दिल्ली के' योजना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को चेतावनी दी कि यदि उसने कोर्ट को गुमराह किया, तो भारी जुर्माना लगाया जाएगा, जो मिसाल बनेगा। दरअसल, राज्य सरकार ने एलजी कार्यालय पर योजना के लिए फंड जारी करने में बाधा डालने का आरोप लगाया है। जवाब में एलजी कार्यालय ने कहा, उपराज्यपाल को बेवजह घसीटा गया है, उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। योजना पर निर्णय सरकार के स्वास्थ्य मंत्री की सोसाइटी करती है।

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जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने शुक्रवार को उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना के कार्यालय को आम आदमी पार्टी सरकार की याचिका पर दो हफ्ते में हलफनामा दायर करने को कहा। पीठ का निर्देश एलजी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील संजय जैन के यह कहने के बाद आया कि एलजी कार्यालय इस मामले में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा, यह ऐसा मामला नहीं है, जहां मंत्रिपरिषद और एलजी के बीच कोई मुद्दा हो। योजना दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता वाली सोसाइटी चलाती है। स्वास्थ्य मंत्री के नेतृत्व में दो जनवरी को बैठक हुई और इसमें फंड रिलीज करने का फैसला किया जा चुका है। इस पर पीठ ने कहा, इस आशय का हलफनामा दाखिल करें। यदि आपकी बात सही पाई जाती है कि मंत्री ने हमें गुमराह किया है, तो हम भारी जुर्माना लगाएंगे।  

हर मसले को प्रतिष्ठा का मुद्दा न बनाएं : पीठ
सुनवाई शुरू होते ही पीठ को सूचित किया गया कि एलजी ने याचिका पर अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। इस पर पीठ ने कहा, एलजी से कहें कि हर मसले को प्रतिष्ठा का मुद्दा न बनाएं। इस पर एलजी के वकील जैन ने कहा, यह याचिका ‘चाय के प्याले में तूफान’ का उत्कृष्ट मामला है, क्योंकि इसमें बिना किसी बात को लेकर बहुत हलचल है।
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यह है योजना
फरिश्ते दिल्ली के...योजना के तहत कोई भी शख्स अगर सड़क हादसे में घायल होता है, तो उसे निजी अस्पताल में इलाज की सुविधा मिलती है। इसका पूरा खर्चा सरकार उठाती है। दिल्ली सरकार ने इसे 2018 में शुरू किया था। हालांकि यह फंड की कमी से बंद हो गई थी। आप सरकार ने आरोप लगाया था, एलजी कार्यालय फंड रिलीज नहीं कर रहा। इतना ही नहीं, आप ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर योजना फिर शुरू कराने की मांग की थी। सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जवाब तलब किया था।

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