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सेंट्रल विस्टा परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाना किया शुरू, पीएम ने रखी थी आधारशिला

Tue, 05 Jan 2021 10:43 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Central Vista project - फोटो : Twitter
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उच्चतम न्यायालय ने केंद्र की महत्वाकांक्षी ‘सेंट्रल विस्टा परियोजना’ की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को अपना फैसला सुनाया। इससे पहले सरकार ने न्यायालय को आश्वासन दिया था कि इस परियोजना को चुनौती देने वाली याचिकाओ का निपटारा होने तक निर्माण कार्य या इमारतों को गिराने या पेड़ों को काटने जैसा कोई काम नहीं किया जाए। परियोजना का शिलान्यास कार्यक्रम 10 दिसंबर को आयोजित हुआ था। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन की नई इमारत की आधारशिला रखी थी।

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इस परियोजना की घोषणा पिछले वर्ष सितम्बर में हुई थी, जिसमें एक नए त्रिभुजाकार संसद भवन का निर्माण किया जाना है। इसमें 900 से 1200 सांसदों के बैठने की क्षमता होगी। इसके निर्माण का लक्ष्य अगस्त 2022 तक है, जब देश स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाएगा।

इस परियोजना के तहत साझा केंद्रीय सचिवालय 2024 तक बनने का अनुमान है। यह परियोजना लुटियंस दिल्ली में राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट तक तीन किलोमीटर लंबे दायरे में फैली हुई है।

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नए संसद भवन का निर्णय जल्दबाजी में नहीं: केंद्र

इससे पहले, शीर्ष अदालत ने कहा था कि सेंट्रल विस्टा परियोजना के लिये जमीनी स्तर पर किसी प्रकार का बदलाव प्राधिकारी अपनी जोखिम पर करेंगे। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि इस परियोजना का भविष्य उसके फैसले पर निर्भर करेगा।

इस मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र ने न्यायालय में तर्क दिया था कि परियोजना से उस धन की बचत होगी, जिसका भुगतान राष्ट्रीय राजधानी में केंद्र सरकार के मंत्रालयों के लिए किराये पर परिसर लेने के लिए किया जाता है। केंद्र ने यह भी कहा था कि नए संसद भवन का निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया गया और परियोजन के लिए किसी भी तरह से किसी भी नियम या कानून का कोई उल्लंघन नहीं किया गया।

न्यायालय में राजीव सूरी सहित अनेक व्यक्तियों ने इस परियोजना को चुनौती दी थी। परियोजना के लिये भूमि उपयोग में बदलाव, पर्यावरण मंजूरी, इसके लिये अनापत्ति प्रमाण पत्र देने सहित विभिन्न मंजूरियों पर भी इन याचिकाओं में सवाल उठाए गए हैं।

केंद्र ने परियोजना के लिए सलाहकार का चयन करने में कोई मनमानी या पक्षपात करने से इंकार करते हुए कहा था कि सिर्फ इस दलील पर परियोजना को रद्द नहीं किया जा सकता कि सरकार इसके लिए बेहतर प्रक्रिया अपना सकती थी। गुजरात स्थित आर्किटेक्चर कम्पनी ‘एचसीपी डिज़ाइन्स’ ने ‘सेंट्रल विस्टा’ के पुनर्विकास के लिए परियोजना के लिए परामर्शी बोली जीती है।
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