27 जून को पहला ट्वीट किया गया था जिसमें उन्होंने लिखा था कि इतिहासकार भारत के बीते छह वर्षों को देखते हैं तो पाते हैं कि कैसे बिना इमरजेंसी के देश में लोकतंत्र खत्म किया गया। इसमें वे (इतिहासकार) सुप्रीम कोर्ट खासकर चार पूर्व सीजेआई की भूमिका पर सवाल उठाएंगे।
दूसरा ट्वीट 29 जून का है और इसमें प्रशांत भूषण ने चीफ जस्टिस एसए बोबडे की हार्ले डेविडसन बाइक के साथ एक तस्वीर साझा की। सीजेआई बोबडे की आलोचना करते हुए लिखा कि उन्होंने कोरोना दौर में अदालतों को बंद रखने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ पूर्व जजों के बयान भी उपलब्ध
25 अगस्त को सुनवाई की शुरुआत में पीठ ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा था कि इस मामले में क्या किया जा सकता है। पीठ ने अटॉर्नी जनरल को सुझाव देने के लिए कहा। जिस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा था, मेरे पास पूर्व जजों द्वारा सुप्रीम के खिलाफ दिए गए बयान भी उपलब्ध है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों की भी सूची है, जिन्होंने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की बात कही गई है।
भूषण को अपने बयान वापस लेने दिया जाए
अटॉर्नी जनरल ने सुझाव दिया था कि भूषण को अपने बयान वापस लेने दिया जाए। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अदालत को भूषण को चेतावनी देकर इस मामले को बंद कर देना चाहिए। इस पर पीठ ने कहा कि हमने भूषण को तीन दिनों का वक्त इसीलिए दिया था। पीठ ने कहा, आखिर इससे क्या होगा? अगर किसी व्यक्ति को अपनी गलती का एहसास न हो और वह बार-बार उसे दोहराएं।
सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त तक का दिया था समय
अदालत ने 20 अगस्त को भूषण को न्यायपालिका के प्रति अपमानजनक ट्वीट के लिए क्षमा याचना से इंकार करने संबंधी अपने बगावती बयान पर पुनर्विचार करने और बिना शर्त माफी मांगने के लिए 24 अगस्त तक का समय दिया था। न्यायालय ने अवमानना के लिए दोषी ठहराए गए भूषण की सजा के मामले पर दूसरी पीठ द्वारा सुनवाई का उनका अनुरोध ठुकराया दिया था।