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दुनिया में खिलौनों का कारोबार सात लाख करोड़ का, भारत को बनाएंगे आत्मनिर्भर: मोदी

Mon, 31 Aug 2020 03:01 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Man ki baat - फोटो : Twitter
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को युवाओं को खिलौनों के साथ एप और कंप्यूटर गेम बनाने का आह्वान करते हुए कहा, दुनिया भर में खिलौने का कारोबार सात लाख करोड़ रुपये से अधिक का है। मगर, इस कारोबार में भारत का हिस्सा बहुत कम है।

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जिस राष्ट्र के पास इतनी विरासत, परंपरा, विविधता और युवा आबादी हो, क्या खिलौनों के बाजार में उसकी हिस्सेदारी इतनी कम होनी चाहिए। हमने इस बात पर मंथन किया कि भारत के बच्चों को नए-नए खिलौने कैसे मिलें। भारत खिलौना उत्पादन में बहुत बड़ा हब कैसे बने?


मन की बात 2.0 के 15वें संस्करण में पीएम ने खिलौने, मोबाइल एप और कंप्यूटर गेम के बाजार में चीन के दबदबे को देखते हुए लघु और बडे़ उद्योगों के साथ-साथ स्टार्ट अप उद्यमियों से अपील करते हुए कहा कहा, आइए मिलकर खिलौने बनाएं। अब सभी के लिए लोकल खिलौनों के लिए वोकल होने का समय आ गया है।
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पीएम ने कहा, कोरोना के कालखंड में मन में ये सवाल आता रहा कि इतने लंबे समय तक घरों में रहने के कारण मेरे छोटे-छोटे बाल-मित्रों का समय कैसे बीतता होगा? हमारे चिंतन का विषय था- खिलौने और विशेषकर भारतीय खिलौने। खिलौने जहां गतिविधि को बढ़ाने वाले होते हैं, हमारी आकांक्षाओं को भी उड़ान देते हैं। खिलौने केवल मन ही नहीं बहलाते, मन भी बनाते हैं और मकसद गढ़ते भी हैं।

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था कि  सबसे अच्छा खिलौना वह होता है जो अधूरा हो। बच्चे मिलकर खेल-खेल में उसे पूरा करें। प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि करीब सौ साल पहले असहयोग आंदोलन के जरिये आत्मनिर्भर भारत निर्माण का बीज बोया गया था। अब इसे वट वृक्ष के रूप में परिवर्तित करना सबका दायित्व है।

बचपन खिले और खिलखिलाए भी
पीएम ने कहा, खिलौना पर्यावरण अनुकूल हो। ऐसा खिलौना जिसकी मौजूदगी में बचपन खिले भी, खिलखिलाए भी। हम ऐसे खिलौने बनाएंजो पर्यावरण के अनुकूल हो। खिलौने एक्टिविटी बढ़ाने वाले और हमारी आकांक्षाओं को उड़ान देने वाले होते हैं। बच्चों के जीवन के अलग-अलग पहलू पर खिलौनों का व्यापक प्रभाव पड़ता है। इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी इस पर व्यापक ध्यान दिया गया है।

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वाराणसी, चन्नापटना में खिलौनों की समृद्ध परंपरा

पीएम ने कहा कि हमारे देश में स्थानीय खिलौनों की बहुत समृद्ध परंपरा रही है। कई प्रतिभाशाली और कुशल कारीगर हैं, जिन्हें अच्छे खिलौने बनाने में महारत हासिल है। कर्नाटक का चन्नापटना, आंध्रप्रदेश का कोंडापल्ली, तमिलनाडु में तंजौर, असम में धुबरी, उत्तर प्रदेश में वाराणसी जैसे कई क्षेत्र खिलौनों के केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।

युवाओं ने जगाई उम्मीद
पीएम ने इस दौरान इसी महीने रखे गए एप इनोवेशन चैलेंज का जिक्र करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में युवाओं ने इस प्रतिस्पर्धा में भाग लिया और कई बेहतरीन एप भी बनाए। इस दौरान पीएम ने इस प्रतिस्पर्धा के तहत बनाए गए कई एप की तारीफ की और कहा कि भविष्य में हमें इसी गति से आगे बढ़ना होगा।

पीएम ने चार एप का भी जिक्र किया। कुटुकी किड्स लर्निंग एप, जो छोटे बच्चों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। कू-एक माइक्रोब्लॉगिंग एप है। इसमें, हम, अपनी मातृभाषा में टेक्स्ट, वीडियो और ऑडियो के जरिए अपनी बात रख सकते हैं।

आस्क सरकार-इस एप में किसी भी सरकारी योजना के बारे में सही जानकारी टेक्स्ट, ऑडियो और वीडियो के जरिए हासिल कर सकते हैं। स्टेप सेट गो-यह एक फिटनेस एप है। आप कितना चले, कितनी कैलोरी घटाई, सारा हिसाब यह एप आपको बताता है। आपको फिट रहने के लिए प्रोत्साहित भी करता है।

हिमाचल हाउंड नस्ल के कुत्ते का जिक्र
कुत्तों की आपदा प्रबंधन और बचाव अभियानों में भी बहुत बड़ी भूमिका होती हैं। भारतीय प्रजातियों में मुधोल हाउंड, हिमाचली हाउंड बहुत ही अच्छी नस्लें हैं। राजापलायम, कन्नी, चिप्पीपराई, और कोम्बाई भी शानदार नस्लें हैं। भारत में तो एनडीआरएफ ने ऐसे दर्जनों डॉग्स को स्पेशली ट्रेन किया है।

पिछले कुछ समय में सेना, सीआईएसएफ, एनएसजी ने मुधोल हाउंड डॉग्स को ट्रेन्ड करके डॉग स्कवॉड में शामिल किया है, सीआरपीएफ ने कोंबाई डॉग्स को शामिल किया है। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च भी भारतीय नस्ल के डॉग्स पर रिसर्च कर रही है।
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