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Supreme Court: फैमिली कोर्ट में गए बिना सहमति से शादी तोड़ने का मामला, एक मई को आ सकता है 'ऐतिहासिक' फैसला

Sat, 29 Apr 2023 05:05 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 29 सितंबर, 2022 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा था कि सामाजिक परिवर्तन में 'थोड़ा समय' लगता है और कभी-कभी कानून लाना आसान होता है लेकिन समाज को इसके साथ बदलने के लिए राजी करना मुश्किल होता है।
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सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट तलाक के लिए पति-पत्नी के बीच आपसी सहमति से विवाह तोड़ने के लिए फैमिली कोर्ट में भेजे बगैर संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शीर्ष न्यायालय को प्राप्त असीम शक्तियों का उपयोग करके व्यापक मानदंडों पर एक मई को फैसला सुना सकता है। न्यायमूर्ति एसके कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति एएस ओका, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 29 सितंबर, 2022 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा था कि सामाजिक बदलाव में 'थोड़ा समय' लगता है और कभी-कभी कानून लाना आसान होता है लेकिन समाज को इसके साथ बदलने के लिए राजी करना मुश्किल होता है।

शीर्ष अदालत ने सुनवाई को दौरान भारत में विवाह में एक परिवार की बड़ी भूमिका निभाने की बात को स्वीकार किया था। संविधान का अनुच्छेद 142 अदालत के समक्ष लंबित किसी भी मामले में "पूर्ण न्याय" करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के हुक्मनामें और आदेशों को लागू किए जाने से संबद्ध है।
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सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर भी विचार कर रहा है कि क्या अनुच्छेद 142 के तहत उसके व्यापक अधिकार किसी भी तरह से एक ऐसी परिस्थिति में बाधित होती हैं, जब अदालत के अनुसार विवाह अपरिवर्तनीय रूप से टूट गया हो, लेकिन एक पक्ष तलाक का विरोध कर रहा हो।

यहां दो सवाल उठते हैं जो पूर्व में संविधान पीठ के पास भेजे गये थे, इसमें यह शामिल है कि क्या अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस तरह के अधिकार क्षेत्र का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए, या इस तरह के कार्य को प्रत्येक मामले में तथ्यों के आधार पर निर्धारित करने के लिए छोड़ देना चाहिए।

प्रश्नों में से एक, जिसे इसमें संदर्भित किया गया है, वह यह है कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों के प्रयोग के लिए व्यापक मानदंड क्या हो सकते हैं, जो हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत निर्धारित अनिवार्य अवधि तक प्रतीक्षा करने के लिए फैमिली कोर्ट में पक्षों को संदर्भित किए बिना आपसी सहमति से विवाह को भंग कर सकते हैं।

20 सितंबर, 2022 को शीर्ष अदालत ने कहा था, हम मानते हैं कि एक और सवाल जिस पर विचार करने की आवश्यकता होगी, वह यह होगा कि क्या भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शक्ति किसी भी तरह से बाधित है, ऐसे परिदृश्य में जहां अदालत की राय में विवाह अपरिवर्तनीय रूप से टूट गया हो लेकिन एक पक्ष तलाक का विरोध कर रहा हो।

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