आईआईटी-जेईई में दाखिले की काउंसलिंग को लेकर लगी रोक के मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने काउंसलिंग पर लगी रोक हटा दी है। शीर्ष अदालत के इस फैसले से हजारों छात्रों को राहत मिली है, जो कि इस मामले में कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे थे।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में एक छात्रा ने ग्रेस मार्क्स को लेकर याचिका दाखिल की थी, जिसमें उसने कहा था कि दो गलत जवाब दिए जाने पर सभी छात्रों को ग्रेस मार्क्स दिए जाने चाहिए। भले ही छात्र का जवाब गलत हो, लेकिन उसकी कोशिश की आधार पर उसे मार्क्स मिलने चाहिए।
IIT-JEE counselling matter: Supreme Court vacated the stay and gave go ahead for conducting counseling for IIT-JEE
— ANI (@ANI_news) July 10, 2017
इससे पहले मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आईआईटी-जेईई की काउंसिलिंग पर रोक लगा दी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की और कहा था कि आईआईटी-जेईई से जुड़ी किसी भी याचिका पर सुनवाई न की जाए। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक मिसरा और ए एम खानविलकर की बेंच ने ये स्टे ऑर्डर जारी किया।
मामला बढ़ जाने के बाद न्यायमूर्ति अभय मोहन सप्रे और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अवकाशकालीन पीठ ने मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय और आईआईटी मद्रास खरी-खरी सुनाई। कोर्ट ने पूछा था कि प्रवेश परीक्षा में ऐसे छात्रों को बोनस अंक क्यों दिए गए, जिन्होंने गलत छपे प्रश्नों को हल करने का प्रयास ही नहीं किया। दोनों को एक हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा था। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला आया है।
गौरतलब है कि छात्रा ने आईआईटी-जेईई परीक्षा में ग्रेस मार्क्स देने को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि परीक्षा में शामिल सभी छात्रों को गलत प्रश्नों के एवज में बोनस अंक दिए गए। इसमें गलत प्रश्नों के एवज में आईआईटी मद्रास ने सभी छात्रों को 18 अंक दिए थे।