नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (NRC) मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट को असम में नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिजंस (एनआरसी) के संयोजक और देश के रजिस्ट्रार जनरल (आरजीआई) का मीडिया में बयान देना नागवार गुजरा है। कोर्ट ने कहा कि आपका काम एनआरसी तैयार कर प्रकाशित करना है। आपको अवमानना का दोषी ठहराकर जेल भी भेजा जा सकता है। एनआरसी संयोजक और आरजीआई ने कहा था कि अंतिम मसौदे में शामिल नहीं किए गए 40 लाख लोग दावों और आपत्तियों के लिए कोई भी दस्तावेज दिखा सकते हैं।
न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की पीठ ने असम में एनआरसी के संयोजक प्रतीक हजेला और आरजीआई शैलष को जमकर फटकार लगाई कि आखिर वे मीडिया के पास क्यों गए? स्वत: संज्ञान लेते हुए पीठ ने संयोजक से कहा कि आपको अदालत ने नियुक्त किया है। आपका काम हमारे निर्देशों को पूरा करना है। ऐसे में आपका बयान हमारा वक्तव्य समझा जा सकता है।
पीठ ने दोनों से कहा कि अभी इस मसले पर परीक्षण चल रहा है। केंद्र सरकार ने अब तक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) तैयार नहीं किया है। ऐसे में आप प्रेस के समक्ष कैसे कह सकते हैं कि दावों और आपत्तियों पर किसी भी तरह का दस्तावेज स्वीकार किया जाएगा। पीठ के सख्त रुख पर हजेला ने माफी मांगते हुआ कहा कि वह सिर्फ आम लोगों की आशंकाएं दूर करना चाहते थे। इस पर पीठ ने कहा कि भविष्य में ऐसा नहीं होना चाहिए। हालांकि आगामी 16 अगस्त को मामले पर शीर्ष अदालत फिर सुनवाई करेगा।
बयान देने से पहले लेनी होगी कोर्ट की अनुमति
पीठ ने कहा कि एनआरसी को अभी अंतिम रूप दिया जाना है और आप लोगों को अभी बहुत काम करना है। लिहाजा हम किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। पीठ ने हजेला और शैलेष को भविष्य में सचेत रहने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि किसी तरह का बयान जारी करने से पहले अदालत की अनुमति लेनी होगी।