छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में खनन परियोजना पर रोक लगाने से SC का इंकार
शीर्ष अदालत ने परसा कोयला ब्लॉक मामले में छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में खनन परियोजना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने अडानी समूह द्वारा संचालित और राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) के स्वामित्व वाली कोयला खनन परियोजना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। पीठ ने साफ किया कि हसदेव अरण्य वन क्षेत्र में परसा कोयला ब्लॉक के लिए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली लंबित याचिकाओं को कोयला खनन गतिविधियों के खिलाफ किसी भी तरह के प्रतिबंध के रूप में नहीं माना जाएगा।
न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि हम विकास के रास्ते में नहीं आना चाहते हैं और हम इस पर बहुत स्पष्ट हैं। हम कानून के तहत आपके अधिकारों का निर्धारण करेंगे लेकिन विकास की कीमत पर नहीं।
केंद्र ने शीर्ष अदालत में दी जानकारी
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पटना में गंगा के बाढ़ क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण की पहचान के लिए जियो-मैपिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। शीर्ष अदालत राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 30 जून, 2020 के आदेश के खिलाफ पटना निवासी अशोक कुमार सिन्हा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस अनिरुद्ध बोस और सुधांशु धूलिया की पीठ को बताया कि इस कवायद में समय लगेगा।