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SC: सुप्रीम कोर्ट ने वसीम रिजवी की याचिका पर लिया संज्ञान, मामलों को जोड़ने की मांग पर शिकायतकर्ता को नोटिस

Fri, 28 Mar 2025 02:38 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वसीम रिजवी पर हरिद्वार में हुई धर्म संसद में भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। रिजवी के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए गए हैं।रिजवी ने जान का खतरा बताते हुए सभी मामलों को जोड़ने की मांग की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। आइए पढ़ते हैं सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें...। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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2021 में हरिद्वार धर्म संसद में मुसलमानों के खिलाफ तीखे भाषण को लेकर दर्ज मामलों को एक करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है। कोर्ट ने जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ सैयद वसीम रिजवी की याचिका पर शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किए। याचिका में उनके खिलाफ सभी आपराधिक मामलों को एक साथ जोड़ने का अनुरोध किया गया है। 

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जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ के सामने अधिवक्ता अनुराग किशोर की दलील दी कि लखनऊ के रहने वाले त्यागी के खिलाफ चार आपराधिक मामले हैं, जिनमें से एक श्रीनगर में है। लगातार धमकियों के कारण जम्मू-कश्मीर की यात्रा करना उनके जीवन के लिए काफी जोखिम भरा है। उन्होंने उत्तराखंड के हरिद्वार में चल रहे मामले के साथ श्रीनगर में मामले को एक साथ जोड़ने की मांग की। पीठ ने जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड सरकार और श्रीनगर में त्यागी के खिलाफ शिकायतकर्ता दानिश हसन को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। वहीं पीठ ने लंबित मामलों में त्यागी को तरह के दंडात्मक उपाय के खिलाफ संरक्षण देने से इनकार कर दिया।

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रिजवी के खिलाफ एक मामला दो जनवरी को हरिद्वार कोतवाली में ज्वालापुर हरिद्वार के रहने वाले नदीम अली की शिकायत पर दर्ज किया गया था। अली ने आरोप लगाया कि 17 से 19 दिसंबर 2021 तक हिंदू संतों द्वारा हरिद्वार में धर्म संसद का आयोजन किया गया था। इसमें प्रतिभागियों को मुसलमानों के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए उकसाया गया था।

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अली ने अपनी शिकायत में कहा कि कथित तौर पर पवित्र कुरान और पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। भड़काऊ बयान बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे। आरोप लगाया कि ये वीडियो त्यागी, यति नरसिंहानंद और अन्य लोगों द्वारा प्रसारित किए गए थे। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि प्रबोधानंद गिरि ने हरिद्वार की मस्जिदों में रहने वाले लोगों के खिलाफ हिंसा फैलाने की कोशिश की थी। अली की शिकायत पर त्यागी, नरसिंधु गिरि, सागर सिंधु महाराज, धर्मदास महाराज, परमानंद महाराज, साध्वी अन्नपूर्णा, स्वामी आनंद स्वरूप और स्वामी प्रबोधानंद गिरि सहित अन्य लोगों पर मामला दर्ज किया था।

सशस्त्र बलों के बच्चों के लिए आरक्षण के खिलाफ सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सैनिकों और सशस्त्र बलों के कर्मियों के बच्चों के लिए मेडिकल पाठ्यक्रमों में एक प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के आदेश को बरकरार रखने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने शुक्रवार को कहा, अंतरिम आदेश के तहत, हाईकोर्ट के समक्ष रिट याचिकाओं के खारिज होने से पहले की स्थिति अगले आदेश तक जारी रहेगी। पीठ ने नोटिस जारी कर तेलंगाना, केंद्र और अन्य से चार सप्ताह के भीतर याचिका पर जवाब मांगा है। याचिका में तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि एक प्रतिशत सीटों के आरक्षण का लाभ केवल सेना, नौसेना और वायु सेना के कर्मियों के बच्चों तक ही सीमित है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) कर्मियों के बच्चों को इससे बाहर रखा गया है।
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चुनावों में दिव्यांगों को दो फीसदी आरक्षण की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने संसद, विधानसभा और ग्राम पंचायत चुनावों में दिव्यांगों के लिए दो फीसदी आरक्षण की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा, हम ऐसा निर्देश कैसे जारी कर सकते हैं? यह नीति का मामला है। पीठ ने व्यक्तिगत रूप से पेश याचिकाकर्ता से पूछा, अगर यह रोजगार या किसी और चीज के संबंध में होता, तो हम इस पर विचार कर सकते थे। लेकिन हम यह निर्देश कैसे दे सकते हैं? याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत के 8 नवंबर 2024 के आदेश का हवाला दिया, जिसमें केंद्र को तीन महीने के भीतर अनिवार्य सुलभता मानकों को लागू करने का निर्देश दिया गया था। पीठ ने कहा, यदि दिव्यांगों को किसी सार्वजनिक कार्यालय तक पहुंच नहीं मिल रही है, तो शीर्ष अदालत यह सुनिश्चित कर रही है कि ऐसा संभव हो सके। अदालत ने सार्वजनिक कार्यालयों में लिफ्ट और रैंप होने की बात की है ताकि दिव्यांगों को पहुंचने में कोई कठिनाई न हो। लेकिन हम चुनावों में दो फीसदी आरक्षण का आदेश नहीं दे सकते।
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