सशस्त्र बलों के बच्चों के लिए आरक्षण के खिलाफ सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सैनिकों और सशस्त्र बलों के कर्मियों के बच्चों के लिए मेडिकल पाठ्यक्रमों में एक प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के आदेश को बरकरार रखने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने शुक्रवार को कहा, अंतरिम आदेश के तहत, हाईकोर्ट के समक्ष रिट याचिकाओं के खारिज होने से पहले की स्थिति अगले आदेश तक जारी रहेगी। पीठ ने नोटिस जारी कर तेलंगाना, केंद्र और अन्य से चार सप्ताह के भीतर याचिका पर जवाब मांगा है। याचिका में तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि एक प्रतिशत सीटों के आरक्षण का लाभ केवल सेना, नौसेना और वायु सेना के कर्मियों के बच्चों तक ही सीमित है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) कर्मियों के बच्चों को इससे बाहर रखा गया है।
चुनावों में दिव्यांगों को दो फीसदी आरक्षण की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने संसद, विधानसभा और ग्राम पंचायत चुनावों में दिव्यांगों के लिए दो फीसदी आरक्षण की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा, हम ऐसा निर्देश कैसे जारी कर सकते हैं? यह नीति का मामला है। पीठ ने व्यक्तिगत रूप से पेश याचिकाकर्ता से पूछा, अगर यह रोजगार या किसी और चीज के संबंध में होता, तो हम इस पर विचार कर सकते थे। लेकिन हम यह निर्देश कैसे दे सकते हैं? याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत के 8 नवंबर 2024 के आदेश का हवाला दिया, जिसमें केंद्र को तीन महीने के भीतर अनिवार्य सुलभता मानकों को लागू करने का निर्देश दिया गया था। पीठ ने कहा, यदि दिव्यांगों को किसी सार्वजनिक कार्यालय तक पहुंच नहीं मिल रही है, तो शीर्ष अदालत यह सुनिश्चित कर रही है कि ऐसा संभव हो सके। अदालत ने सार्वजनिक कार्यालयों में लिफ्ट और रैंप होने की बात की है ताकि दिव्यांगों को पहुंचने में कोई कठिनाई न हो। लेकिन हम चुनावों में दो फीसदी आरक्षण का आदेश नहीं दे सकते।