याचिका पर न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की पीठ सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा "याचिकाकर्ताओं को केरल राज्य और भारत संघ के लिए स्थायी वकील करने की अनुमति है। याचिकाकर्ताओं ने बताया है कि सॉलिसिटर जनरल (एसजी) के कार्यालय को पहले ही नोटिस दिया जा चुका है। इसलिए, मुद्दों की गंभीरता को देखते हुए हम अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) और केरल सरकार के स्थायी वकील से अनुरोध करते हैं कि चार हफ्तों के भीतर निर्देश हासिल करें और जवाब दाखिल करें।"
याचिका केरल प्रवासी संघ और अन्य के द्वारा दायर की गई थी। इसमें एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग की गई थी। ताकि, कुत्तों के काटने पर दिए जाने वाले रेबीज टीके के प्रभाव का अध्ययन किया जा सके।
शीर्ष अदालत से दिल्ली सरकार को फटकार
वहीं, शीर्ष अदालत ने आज 114 दोषियों के माफी के आवेदनों पर फैसला करने में देरी के लिए दिल्ली सरकार को फटकार लगाई है। इनमें जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) का एक आतंकवादी भी शामिल है। जिसे देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने का दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
ये कैदी 14 साल से अधिक समय जेल में गुजार चुके हैं। न्यायमूर्ति अभय ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने इन कैदियों के माफी के आवेदनों को खारिज करने के लिए राज्य को फटकार लगाई। एएसजी विक्रमजीत बनर्जी ने अदालत को बताया कि गफूर (जेईएम का दोषी कैदी) सहित 114 दोषियों की समय पूर्व रिहाई पर विचार करने के लिए सजा समीक्षा बोर्ड ने 21 दिसंबर को बैठक की थी। उन्होंने कहा, बैठक का मसौदा राज्यपाल को सौंपने के लिए दिल्ली सरकार के गृह विभाग को भेज दिया गया था।
पीठ ने दिल्ली सरकार से कहा, "आप शीर्ष अदालत के 11 दिसंबर के आदेश का पूरी तरह से उल्लंघन कर रहे हैं। आपने स्पष्ट नहीं किया है कि आप किस माफी नीति का पालन कर रहे हैं। आपने जो किया, वह बहुत आपत्तिजनक है। जब माफी देने की बात आती है, तो सभी राज्य सरकारें समान हैं। एक ही ढांचा (पैटर्न) है। सभी राज्य सरकारें विचार किए बिना ही पहले आवेदन को अस्वीकार कर देती हैं।"