दूसरी राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग(एसएजेपीसी) की सिफारिशों के मुताबिक निचली अदालत के न्यायाधीशों के बकाया वेतन और अन्य बकाया भुगतान करने के लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों को सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम मौका दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अंतिम अवसर दिया
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, आदेश के अनुपालन के लिए एक आखिरी मौका दिया जा रहा है। निर्देश 8 दिसंबर 2023 को या उससे पहले प्रभावी होंगे। यदि फिर भी आदेशों की अवमानना होती है तो, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव व्यक्तिगत रूप से अदालत के सामने पेश होंगे। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा, अनुपालन का अर्थ- प्रत्येक न्यायिक अधिकारी और पारिवारिक पेंशन के मामले में जीवित पति-पत्नी को देय राशि का वास्तविक क्रेडिट होगा।
बता दें एसएनजेपीसी की सिफारिशें जिला न्यायपालिका की सेवा शर्तों के विषयों,वेतन संरचना, पेंशन और पारिवारिक पेंशन और भत्ते को कवर करती हैं। मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, 19 मई को दिए उनके आदेशों के बावजूद कुछ राज्यों ने उसका अनुपालन नहीं किया है। पीठ ने कहा, पहली नजर में लग रहा है, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सचिव आदेश की अवमानना कर रहे हैं।
गौरतलब है कि जिला न्यायपालिका को न्यायिक प्रणाली का अहम अंग बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को आदेश दिया था कि सभी राज्यों को एसएनजेपीसी की सिफारिशों के मुताबिक निचली अदालत के न्यायाधीशों के बकाया और अन्य भुगतान करना होगा। 2020 में न्यायमूर्ति पीवी रेड्डी की अध्यक्षता वाली एसएनजेपीसी द्वारा दी सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। साथ ही कोर्ट ने राज्यों को आदेश दिए थे कि न्यायिक अधिकारियों के खातों में बकाया भुगतान किया जाए।
कोर्ट ने कहा था कि एसएनजेपीसी की सिफारिशों को लागू करने के लिए सभी न्यायक्षेत्रों में न्यायिक अधिकारियों के सेवा नियमों में जिला न्यायपालिका में कैडर की एकरूपता जैसे मुद्दों पर आवश्यक संशोधन किए जाने चाहिए। साथ ही एक अन्य आदेश में पीठ ने तेलंगाना हाईकोर्ट को राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुरूप न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 61 वर्ष करने की भी अनुमति दी।