उन्नाव दुष्कर्म मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट से बड़ा अपडेट आ रहा है। शीर्ष अदालत ने मामले से जुड़े लोगों और गवाहों को दी गई सीआरपीएफ सुरक्षा वापस लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया है कि इस मामले में दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि पीड़िता को दी गई सीआरपीएफ सुरक्षा जारी रहेगी।
पीड़िता की सीआरपीएफ सुरक्षा वापस लेने से इनकार
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की सीआरपीएफ सुरक्षा वापस लेने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभी भी खतरे की आशंका है। हालांकि, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने पीड़िता के परिवार के सदस्यों और अन्य गवाहों को दी गई सीआरपीएफ सुरक्षा वापस ले ली। कोर्ट ने कहा कि मामले में दोषसिद्धि पहले ही हो चुकी है।
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आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी
पीठ ने कहा, 'हमारा मानना है कि इस कोर्ट से संबंधित व्यक्तियों को उस वक्त दी गई सुरक्षा जारी नहीं रखी जा सकती, क्योंकि मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। हालांकि, हम यह साफ करते हैं कि अगले आदेश तक पीड़िता के लिए सीआरपीएफ सुरक्षा जारी रहेगी।'
स्थानीय पुलिस से संपर्क कर सकते हैं
शीर्ष न्यायालय ने कहा कि यदि परिवार के सदस्यों और अन्य गवाहों को अभी भी कोई खतरा महसूस होता है तो वे स्थानीय पुलिस से संपर्क कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि मामले में दोषसिद्धि हो चुकी है और उन्होंने सीआरपीएफ सुरक्षा कवर वापस लेने की अनुमति मांगी। केंद्र ने 2019 में न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें प्रदान की गई सीआरपीएफ सुरक्षा वापस लेने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी।
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सेंगर की अपील दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित
उत्तर प्रदेश के उन्नाव में 2017 में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोप में निष्कासित भाजपा नेता कुलदीप सिंह सेंगर जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। शीर्ष न्यायालय ने 1 अगस्त, 2019 को पीड़िता, उसकी मां, परिवार के अन्य सदस्यों और उनके वकील को सीआरपीएफ सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था। मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली सेंगर की अपील दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है।
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पुलिस सुधारों से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट मई में सुनवाई करेगा
एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह पुलिस सुधारों पर 2006 के अपने फैसले को लागू करने की मांग वाली याचिकाओं पर मई में सुनवाई करेगा। इसमें जांच और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारियों को अलग-अलग करने जैसे कदमों की सिफारिश की गई थी। बाद में शीर्ष अदालत ने अन्य निर्देश भी पारित किए, जिसमें राज्य सरकारों द्वारा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पद पर कोई तदर्थ या अंतरिम नियुक्ति नहीं करना शामिल है। शीर्ष अदालत ने कहा था कि संघ लोक सेवा आयोग को राज्य सरकार और अन्य हितधारकों के परामर्श से तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की सूची तैयार करनी होगी और राज्य उनमें से किसी एक को डीजीपी के रूप में नियुक्त कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई
मधुमिता शुक्ला मर्डर केस में पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की समयपूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
कवियत्री मधुमिता शुक्ला मर्डर केस में सु्प्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी की समय पूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। उत्तर प्रदेश कारगार विभाग ने 2018 की छूट नीति के आधार पर 2023 में समय पूर्व रिहाई का आदेश जारी किया था। तब तक दंपती 18 साल की सजा काट चुके थे। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और पीबी वराले की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कवियत्री की बहन निधि शुक्ला को हाईकोर्ट जाने के लिए कहा। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को संरक्षण देने से इनकार किया और निचली अदालत में जाने के लिए कहा।
सुरेंद्र कोली की बरी किए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई तीन अप्रैल को
निठारी हत्याकांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट तीन अप्रैल को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर याचिकाओं सहित अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई सहमति जताई थी। इन याचिकाओं में 16 अक्तूबर 2023 को कोली को बरी किए जाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। मंगलवार को न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ के समक्ष याचिका सूचीबद्ध की गई। एक वकील ने पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया और अनुरोध किया कि याचिकाओं पर अगले सप्ताह सुनवाई की जाए। इस पर पीठ ने मामले की अगली सुनवाई तीन अप्रैल के लिए स्थगित कर दी।
सट्टेबाजी एप पर प्रतिबंध लगाने के लिए जनहित याचिका दायर
युवाओं पर सट्टेबाजी एप के विनाशकारी प्रभाव का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। इसमें एप पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। प्रचारक केए पॉल ने जनहित याचिका में क्रिकेटरों और बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय अभिनेताओं सहित मशहूर हस्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है। जो सट्टेबाजी प्लेटफार्मों का समर्थन करके अपने विशाल प्रशंसकों को गुमराह और हानिकारक व्यवहार को प्रोत्साहित करते हैं। पॉल ने केंद्र सरकार से सभी जुए और सट्टेबाजी एप पर प्रतिबंध लगाने और उनके खिलाफ कड़े कानून लाने के लिए निर्णायक कार्रवाई करने का भी आग्रह किया।
बीआरएस विधायकों की अयोग्यता की मांग करने वाली याचिका पर हुई सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि क्या कोई हाई कोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को विधायकों की अयोग्यता की मांग करने वाली याचिकाओं पर फैसला करने के लिए निश्चित समय के भीतर कार्रवाई करने के लिए कह सकता है। जस्टिस बीआर गवई और ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ कांग्रेस में शामिल हुए कुछ बीआरएस विधायकों की अयोग्यता की मांग करने वाली याचिकाओं पर फैसला करने में तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष द्वारा कथित देरी के मुद्दे को उठाने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा कि हम मामले के गुण-दोष पर विचार नहीं कर रहे हैं। हम केवल इस सवाल पर विचार कर रहे हैं कि क्या कोई हाईकोर्ट जब स्पीकर अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग नहीं करता है, तो स्पीकर को एक निश्चित अवधि के भीतर कानून के अनुसार काम करने का निर्देश दे सकता है। याचिका में राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए तीन बीआरएस विधायकों की अयोग्यता की मांग करने वाली याचिकाओं से संबंधित मामले में तेलंगाना हाई कोर्ट के नवंबर 2024 के फैसले को चुनौती दी गई है। जबकि दूसरी याचिका दलबदल करने वाले शेष सात विधायकों से संबंधित है।
लाल किले के संरक्षण वाली याचिका का किया निपटारा
सुप्रीम कोर्ट ने 17वीं शताब्दी के मुगलकालीन स्मारक लाल किले के जीर्णोद्धार और संरक्षण की मांग वाली दो दशक से अधिक पुरानी जनहित याचिका का मंगलवार को निपटारा कर दिया। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि उसके विशेषज्ञ पैनल ने अधिकांश निर्देशों का अनुपालन किया है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने याचिकाकर्ता राजीव सेठी की ओर से 2003 में दायर याचिका का निपटारा कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि स्मारक का संरक्षण अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार नहीं किया गया। शीर्ष अदालत ने उल्लेख किया कि 6 अगस्त, 2004 को उसने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक सहित नौ सदस्यीय पैनल का गठन किया था। पीठ ने आगे कहा, तब से 20 वर्ष बीत चुके हैं और हमारे पास यह मानने का कोई कारण नहीं है कि विशेषज्ञ समिति ने कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया है।
रोड रेज के परिणाम दोनों पक्षों के लिए विनाशकारी, हत्या के दोषी को 7 साल की सजा : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रोड रेज के परिणाम दोनों पक्षों के लिए विनाशकारी होते हैं। यह संदेश देते हुए शीर्ष अदालत ने मंगलवार को रोड रोज की एक घटना में लोहे की छड़ से दूसरे व्यक्ति की हत्या के दोषी एक व्यक्ति को सात साल की सजा सुनाई। हालांकि, जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने अपीलकर्ता रविंदर कुमार उर्फ राजू की सजा को हत्या से गैर इरादतन हत्या में बदल दिया। पीठ ने कहा, यह कृत्य बिना किसी पूर्व योजना के था और यह एक विवाद के कारण हुआ था, जिसमें मृतक समूह हमलावर था। बता दें कि यह घटना तब हुई, जब पीड़ित अपने पिता के साथ मोटरसाइकिल से जा रहा था और उसने एक तिपहिया वाहन का पीछा किया जो एक अन्य स्कूटर चालक से टकरा गया था। पीठ ने कहा, हमें स्पष्ट रूप से ध्यान देना होगा कि मृतक के पिता और जिस स्कूटर चालक को टक्कर मारी गई थी, दोनों ने ही कहा था कि तिपहिया वाहन का नंबर उनके पास है। इसके बावजूद उन्होंने पुलिस से संपर्क करना उचित नहीं समझा और कानून को अपने हाथ में ले लिया, जबकि वे तिपहिया वाहन का पीछा कर रहे थे जो हिट एंड रन में शामिल था। अदालत ने कहा कि यह पांच व्यक्तियों का समूह था, जिसने हिट एंड रन में शामिल वाहन के तीन सवारों से खूनी झड़प की थी।
एआईएफएफ के संविधान को अंतिम रूप पर सुनवाई शुरू
सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के संविधान को अंतिम रूप देने से संबंधित याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई शुरू की। इसका मसौदा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एल नागेश्वर राव ने शीर्ष अदालत के निर्देश पर तैयार किया था। महासंघ की तरफ से दायर एक याचिका सहित कई याचिकाओं को जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ समक्ष सुनवाई के लिए रखा गया। पीठ ने कहा कि वह अगले बुधवार को उन वकीलों का पक्ष सुनेगी जिन्हें खेल निकाय के मसौदा संविधान पर आपत्ति है।