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Supreme Court: नीट-UG दोबारा परीक्षा मामले में तत्काल सुनवाई नहीं; रजिस्ट्री से फाइल गुम, CJI ने लिया संज्ञान

Wed, 17 Jun 2026 12:36 PM IST
Jyoti Bhaskar न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। यह याचिका राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के परीक्षा रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर हुई थी। इसमें लगभग 22 लाख उम्मीदवारों के लिए देशव्यापी दोबारा परीक्षा को चुनौती दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया। याचिका में 3 मई की परीक्षा को रद्द करने के फैसले पर सवाल उठाया गया था। इसमें उन लाखों उम्मीदवारों के लिए राहत मांगी गई जो कथित पेपर लीक से जुड़े नहीं थे। मुख्य न्यायाधीश ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि नीट-यूजी 2026 से संबंधित याचिकाएं पहले से ही न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की पीठ सुन रही है। यह याचिका भी जुलाई में उसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्व सहायक महानिदेशक मंगला कोहली ने यह जनहित याचिका दायर की है।

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एनटीए के फैसले पर सवाल
याचिका एनटीए के 3 मई को आयोजित नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द करने के फैसले पर सवाल उठाती है। इसमें पेपर लीक और कदाचार के आरोपों के बाद दोबारा परीक्षा का आदेश देने को चुनौती दी गई है। याचिका के अनुसार, लाखों निर्दोष उम्मीदवारों के संवैधानिक अधिकारों का बलिदान नहीं किया जा सकता। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में राष्ट्रव्यापी गड़बड़ी के बजाय स्थानीय स्तर पर समझौता पाया गया है। एनटीए महानिदेशक अभिषेक सिंह ने मंगलवार को आश्वस्त किया कि दोबारा परीक्षा सुरक्षित और त्रुटि रहित ढंग से होगी।

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा फाइल गुम होने पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने लिया कड़ा संज्ञान
एक अन्य मामले में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा एक मामले की फाइल कथित तौर पर गुम होने के आरोप का कड़ा संज्ञान लिया। बुधवार को यह मामला तब सामने आया जब एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ के समक्ष इसका उल्लेख किया। वकील ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में एक याचिका दायर की गई थी। लेकिन अभी तक उसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है। वकील ने रजिस्ट्रार को इस बारे में लिखा था। हालांकि, फाइल रजिस्ट्री द्वारा गुम होने के कारण मामला अदालत में सूचीबद्ध नहीं हो सका।

मामले की तात्कालिकता का हवाला देते हुए, वकील ने पीठ से याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आग्रह किया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "यह एक गंभीर मामला है यदि रजिस्ट्री ने फाइल गुम कर दी है।" उन्होंने आगे कहा, "यदि हमारी रजिस्ट्री जरूरी मामलों में फाइलें गुम कर रही है, तो क्या आपको लगता है कि मैं केवल सूचीबद्ध करने का निर्देश दूंगा? मुझे कुछ और करना होगा।" मुख्य न्यायाधीश ने वकील से विवरण देने को कहा। उन्होंने कहा, "मैं इस अक्षमता को देखना चाहूंगा और इसके पीछे का कारण पता लगाऊंगा।" मुख्य न्यायाधीश ने वकील से अपने अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड (एओआर) को उसी दिन शिकायत देने को कहा।

रजिस्ट्री पर पहले भी नाराजगी जता चुके हैं चीफ जस्टिस
मई में, मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री पर नाराजगी व्यक्त की थी। पीठ ने उसके आचरण को "भद्दा" बताया था। उन्होंने कहा था कि उसके अधिकारी खुद को "सुपर मुख्य न्यायाधीश" समझते हैं। यह टिप्पणी एक कथित निवेश धोखाधड़ी के आरोपी द्वारा दायर जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान की गई थी।

मुख्य न्यायाधीश का सख्त रुख
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि फाइलों का गुम होना अस्वीकार्य है। उन्होंने इस मामले की पूरी जांच करने का आश्वासन दिया। मुख्य न्यायाधीश ने इस अक्षमता के कारणों का पता लगाने पर जोर दिया।

न्यायिक प्रक्रिया में व्यवधान डालने की किसी भी कोशिश के गंभीर होंगे परिणाम
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक पूर्व न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी से जुड़े मामले की सुनवाई से लगातार चार जजों के अलग होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में व्यवधान उत्पन्न करने की किसी भी कोशिश के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। सुनवाई के दौरान वकील अमरीश कुमार जैन ने अदालत को बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की जस्टिस लीसा गिल (तत्कालीन चीफ जस्टिस), जस्टिस संजीव बेरी, जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस दीपक सिब्बल सुनवाई से स्वयं को अलग कर चुके हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कुछ तथाकथित वरिष्ठ वकील ऐसी परिस्थितियां पैदा कर रहे हैं, जिससे न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा तीन-चार वरिष्ठ वकील व्यवस्था में अव्यवस्था फैला रहे हैं और मैं इस पर करीबी नजर रखे हुए हूं। अन्य हाईकोर्ट में मामला स्थानांतरित करने की मांग ठुकराई...सुप्रीम कोर्ट ने मामले को किसी अन्य हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग ठुकरा दी। अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस को निर्देश दिया कि वे दो जजों की नई खंडपीठ गठित करें। साथ ही कहा गया कि नामित जज किसी भी परिस्थिति में सुनवाई से अलग न हों। शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि मामले की सुनवाई 13 जुलाई से रोजाना की जाए और फैसला सुरक्षित होने के बाद अनुपालन रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाए।

एसटी आयकर छूट में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग पर सुनवाई से इन्कार
अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को मिलने वाली आयकर छूट में क्रीमी लेयर व्यवस्था लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इन्कार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह मामला कानून और सार्वजनिक नीति से जुड़ा है, जिस पर निर्णय लेना संसद और सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय को याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांग रखने की छूट दी। याचिका में आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 11 तथा अनुसूची-तीन के क्रमांक 19 को चुनौती दी गई थी। इस प्रावधान के तहत छठी अनुसूची के क्षेत्रों और अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड तथा त्रिपुरा में रहने वाले अनुसूचित जनजाति के लोगों को कुछ आय पर कर छूट प्रदान की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि वर्तमान व्यवस्था आर्थिक रूप से कमजोर और अत्यंत संपन्न आदिवासियों के बीच कोई भेद नहीं करती। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये कमाने वाले व्यवसायी और बड़े संस्थानों के मालिक भी इस कर छूट का लाभ उठा रहे हैं, जिससे समान परिस्थितियों में रहने वाले गैर आदिवासी करदाताओं के साथ असमानता पैदा होती है।

सीजेआई बोले-दलीलें सही भी हो सकती है पर संसद की समिति के समक्ष उठाया जाए मामला
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि याचिकाकर्ता की दलीलें सही भी हो सकती हैं लेकिन इसके समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट उचित मंच नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मुद्दे को संसद की समिति के समक्ष उठाया जाए, जो कानूनों में संशोधन या नई व्यवस्था पर विचार कर सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी प्रावधान के दुरुपयोग के आरोप मात्र से वास्तविक और पात्र लाभार्थियों को उसका लाभ देने से नहीं रोका जा सकता।
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12 साल से जेल में बंद आईएम के दो संदिग्धों की अर्जी पर दिल्ली पुलिस को सुप्रीम नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से इंडियन मुजाहिदीन के दो सदस्यों की जमानत अर्जी पर जवाब मांगा है। दोनों आतंकवाद से जुड़े मामलों के सिलसिले में करीब 12 साल से जेल में हैं। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने मोहम्मद साकिब अंसारी और वकार अजहर की याचिकाओं पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। दोनों ने इन याचिकाओं में उन्हें जमानत न देने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। पीठ ने कहा कि जनवरी में कोर्ट की ओर से तय किए गए सिद्धांत ही इस मामले में लागू होंगे। उन सिद्धांतों के तहत दिल्ली दंगों के कई आरोपियों को जमानत दी गई थी, जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम को एक साल तक जमानत नहीं दी गई थी। दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने कहा कि जमानत न देने का हाईकोर्ट का आदेश ठोस वजहों पर आधारित था। उसमें इस साल 5 जनवरी को आए गुलफिशा फातिमा मामले के फैसले में तय किए गए सिद्धांतों को लागू किया गया था।    

ठग सुकेश की पत्नी लीना की जमानत याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट ने ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 200 करोड़ रुपये की रंगदारी मामले में अभिनेत्री लीना मारिया पॉलोज की जमानत याचिका पर बुधवार को दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को तय की है। लीना मारिया पॉलोज ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत दर्ज मामले में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। वह इस मामले में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर की पत्नी हैं। इससे पहले 5 मई को दिल्ली हाईकोर्ट ने मकोका मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दर्ज संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें जमानत दे दी गई थी। हाईकोर्ट में पॉलोज की ओर से दलील दी गई थी कि वह सितंबर 2021 से जेल में हैं और लंबे समय से हिरासत में रहने, मुकदमे में देरी तथा सह-आरोपियों को मिली जमानत के आधार पर उन्हें भी राहत मिलनी चाहिए। बचाव पक्ष ने यह भी कहा था कि वह अपने पति की कथित आपराधिक गतिविधियों से अनजान थीं और उनके फरार होने की कोई आशंका नहीं है।
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