सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को जम्मू कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल किए जाने की समयसीमा तय करने का अनुरोध करने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की गई। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने आश्वासन दिया कि वह दो महीने के अंदर इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगा। एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण की तरफ से इस आवेदन के तत्काल सूचीबद्ध किए जाने की मांग की गई थी।
पीएमएलए कानून पर 2022 के निर्णय पर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई टली
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने पीएमएलए कानून पर 2022 के अपने फैसले पर दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई 27 नवंबर तक टाल दी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में इस कानून के तहत ईडी की गिरफ्तार करने और आरोपियों की संपत्ति जब्त करने की शक्तियों को बरकरार रखा था। इसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं।
हालांकि, गुरुवार को याचिकाकर्ताओं का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल मौजूद नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को जब इसकी जानकारी दी गई तो कोर्ट ने कहा कि यही होता है जब हम मामले को सूचीबद्ध करते हैं और कोई मौजूद न हो। हालांकि, मामले पर सुनवाई को टालने की अपील का ईडी के वकील ने भी विरोध नहीं किया।
नायब सैनी के सीएम पद की शपथ पर रोक लगाने से SC का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में नायब सिंह सैनी के शपथ ग्रहण समारोह पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, यह किस तरह की याचिका है? (याचिका) को ध्यान में रखकर खारिज कर दिया गया है।
इससे पहले नायब सैनी ने पंचकूला में आयोजित एक समारोह में दूसरी बार हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत वरिष्ठ भाजपा नेता और एनडीए गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं के अलावा आम लोग भी इस समारोह में मौजूद थे। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने पंचकूला के दशहरा मैदान में उन्हें हरियाणा के सीएम के तौर पर शपथ दिलाई।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने हरियाणा विधानसभा चुनाव की मतगणना के दौरान कुछ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में कथित गड़बड़ियों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 20 शिकायतें थीं और मतगणना के दौरान ईवीएम 99 प्रतिशत बैटरी क्षमता पर काम कर रही थीं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर ईवीएम मतगणना के दौरान 60 से 70 प्रतिशत बैटरी क्षमता पर काम करती हैं। पीठ ने शपथ समारोह पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और सवाल किया, हम निर्वाचित सरकार को शपथ लेने से कैसे रोक सकते हैं? पीठ ने याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाने की चेतावनी देते हुए कड़ी आपत्ति भी जताई। सीजेआई ने कहा, क्या आप चाहते हैं कि हम निर्वाचित सरकार के शपथ ग्रहण को रोकें? हम आपको सतर्क कर रहे हैं। हम जुर्माना लगाएंगे। पीठ ने इसके बाद याचिका खारिज कर दी।