सुरेंद्र कोली की रिहाई के खिलाफ याचिका पर 25 मार्च को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने 2006 के निठारी हत्याकांड में सुरेंद्र कोली को बरी किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई को तैयार हो गया। इस मामले में 25 मार्च को होगी। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि यह मामला यूपी के निठारी में हुई बहुत गंभीर और वीभत्स हत्याओं से जुड़ा है। कोली के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ सबूत एक इकबालिया बयान है, जो मामले में पुलिस हिरासत के कई दिनों बाद दर्ज किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ टिप्पणी के लिए राज्य विधान परिषद से राजद नेता सुनील कुमार सिंह के निष्कासन को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतिम सुनवाई तय की। इस दौरान उन्होंने कहा कि विधायकों को असहमति जताते समय भी सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। बता दें कि जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए नौ जनवरी की तारीख तय की है।
अदालत ने कहा, विधायकों को असहमति जताते समय भी सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने यह कहा कि सदन के अंदर बोलने की स्वतंत्रता को व्यापक छूट दी गई है। सांगवी ने कहा कि इसी तरह के शब्द एक अन्य विधायक ने भी कहे थे, जिन्हें सस्पेंड कर दिया गया, लेकिन सुनील कुमार सिंह को निष्कासित कर दिया गया।
सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने सिंघवी से पूछा, सदन के अंदर बोलने की आजादी का इस्तेमाल इस तरह किया जाता है? आप (सिंघवी) भी संसद सदस्य हैं। क्या आप सदन के अंदर अपने विरोधियों के खिलाफ ऐसी भाषा के इस्तेमाल के पक्ष में हैं? इसका जवाब देते हुए सिंघवी ने कहा कि वे ऐसी भाषा के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने के बाद निष्कासन कर देने से विपक्षी बेंच खाली हो जाएगी। इसके बाद पीठ ने सिंघवी से मामले की अंतिम सुनवाई की तैयारी करने को कहा और इसे नौ जनवरी के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
समलैंगिक विवाह: सुप्रीम कोर्ट 9 जनवरी को पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार करेगा
सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच 9 जनवरी को समलैंगिक विवाह को कानूनी मंजूरी देने से इनकार करने वाले अक्तूबर 2023 के अपने फैसले की समीक्षा की मांग करने वाली याचिकाओं पर विचार करेगी। जस्टिस बीआर गवई, सूर्यकांत, बीवी नागरत्ना, पीएस नरसिम्हा और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच इस मामले से जुड़ी करीब 13 याचिकाओं पर चैंबर में सुनवाई करेगी। परंपरा के अनुसार, पुनर्विचार याचिकाओं पर जज चैंबर में विचार करते हैं। शीर्ष अदालत ने पुनर्विचार याचिकाओं पर खुली अदालत में सुनवाई की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। 10 जुलाई, 2024 को वर्तमान सीजेआई न्यायमूर्ति संजीव खन्ना द्वारा पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लेने के बाद नई पीठ का गठन किया गया।