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SC: आसाराम बापू को चिकित्सा आधार पर मिली अंतरिम जमानत; अनुयायियों से मिलने की इजाजत नहीं

Tue, 07 Jan 2025 01:28 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने सोमवार को स्पष्ट किया कि अगर अंतिम सुनवाई निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार नहीं हो पाती है तो याचिकाकर्ता अदालत से सजा के निलंबन का अनुरोध कर सकते हैं।
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Supreme Court - फोटो : PTI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने 2013 के दुष्कर्म मामले में बाबा आसाराम बापू को चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत दे दी। अदालत ने निर्देश दिया कि अंतरिम जमानत पर रिहा होने के बाद आसाराम सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश नहीं करेगे और अपने अनुयायियों से नहीं मिलेंगे। कोर्ट ने उन्हें 15 मार्च तक के लिए यह अतंरिम जमानत दी है।

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 सजा के खिलाफ सज्जन की अर्जी पर जुलाई में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट 1984 के सिख विरोधी दंगे में सजा के खिलाफ कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार और पूर्व पार्षद बलवान खोखर की याचिकाओं पर जुलाई में सुनवाई करेगा। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने सोमवार को स्पष्ट किया कि अगर अंतिम सुनवाई निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार नहीं हो पाती है तो याचिकाकर्ता अदालत से सजा के निलंबन का अनुरोध कर सकते हैं। शीर्ष अदालत ने ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड तलब किए, जो सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराए जाएंगे।

वहीं, एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव (गृह) अश्विनी कुमार को दिल्ली वक्फ बोर्ड प्रशासक के रूप में नियुक्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। कुमार की नियुक्ति 10 जनवरी से प्रभावी होगी। जस्टिस एमएम सुंद्रेश और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने याचिकाकर्ता जमीर अहमद जुमलाना को दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करने को कहा। जुमलाना ने कुमार को वक्फ बोर्ड के प्रशासन के रूप में काम करने से रोकने और कार्यालय को तत्काल खाली करने का निर्देश देने की मांग की थी।

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Supreme Court - फोटो : ANI
सुरेंद्र कोली की रिहाई के खिलाफ याचिका पर 25 मार्च को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने 2006 के निठारी हत्याकांड में सुरेंद्र कोली को बरी किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई को तैयार हो गया। इस मामले में 25 मार्च को होगी। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि यह मामला यूपी के निठारी में हुई बहुत गंभीर और वीभत्स हत्याओं से जुड़ा है। कोली के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ सबूत एक इकबालिया बयान है, जो मामले में पुलिस हिरासत के कई दिनों बाद दर्ज किया गया था।

राजद नेता के निष्कासन को चुनौती देने वाली याचिका पर नौ जनवरी को होगी सुनवाई

Supreme Court - फोटो : ANI
सुप्रीम कोर्ट ने आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ टिप्पणी के लिए राज्य विधान परिषद से राजद नेता सुनील कुमार सिंह के निष्कासन को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतिम सुनवाई तय की। इस दौरान उन्होंने कहा कि विधायकों को असहमति जताते समय भी सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। बता दें कि जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए नौ जनवरी की तारीख तय की है। 

अदालत ने कहा, विधायकों को असहमति जताते समय भी सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने यह कहा कि सदन के अंदर बोलने की स्वतंत्रता को व्यापक छूट दी गई है। सांगवी ने कहा कि इसी तरह के शब्द एक अन्य विधायक ने भी कहे थे, जिन्हें सस्पेंड कर दिया गया, लेकिन सुनील कुमार सिंह को निष्कासित कर दिया गया। 

सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने सिंघवी से पूछा, सदन के अंदर बोलने की आजादी का इस्तेमाल इस तरह किया जाता है? आप (सिंघवी) भी संसद सदस्य हैं। क्या आप सदन के अंदर अपने विरोधियों के खिलाफ ऐसी भाषा के इस्तेमाल के पक्ष में हैं? इसका जवाब देते हुए सिंघवी ने कहा कि वे ऐसी भाषा के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने के बाद निष्कासन कर देने से विपक्षी बेंच खाली हो जाएगी। इसके बाद पीठ ने सिंघवी से मामले की अंतिम सुनवाई की तैयारी करने को कहा और इसे नौ जनवरी के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
समलैंगिक विवाह: सुप्रीम कोर्ट 9 जनवरी को पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार करेगा
सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच 9 जनवरी को समलैंगिक विवाह को कानूनी मंजूरी देने से इनकार करने वाले अक्तूबर 2023 के अपने फैसले की समीक्षा की मांग करने वाली याचिकाओं पर विचार करेगी। जस्टिस बीआर गवई, सूर्यकांत, बीवी नागरत्ना, पीएस नरसिम्हा और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच इस मामले से जुड़ी करीब 13 याचिकाओं पर चैंबर में सुनवाई करेगी। परंपरा के अनुसार, पुनर्विचार याचिकाओं पर जज चैंबर में विचार करते हैं। शीर्ष अदालत ने पुनर्विचार याचिकाओं पर खुली अदालत में सुनवाई की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। 10 जुलाई, 2024 को वर्तमान सीजेआई न्यायमूर्ति संजीव खन्ना द्वारा पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लेने के बाद नई पीठ का गठन किया गया।
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