सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की जेलों में बंद लगभग 4.5 लाख विचाराधीन कैदियों के मताधिकार को फिर मान्यता देने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने वकील प्रशांत भूषण की इस दलील पर गौर किया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 62(5) के तहत लगाया गया वर्तमान पूर्ण प्रतिबंध संवैधानिक गारंटी और अंतर्राष्ट्रीय लोकतांत्रिक मानदंडों का उल्लंघन करता है।
पंजाब के पटियाला की रहने वाली सुनीता शर्मा की ओर से दायर याचिका में केंद्रीय मंत्रालय के जरिए केंद्र और चुनाव आयोग को वादी बनाया गया है। इस याचिका में यह सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक दखल की मांग की गई है कि जिन कैदियों को चुनावी अपराधों या भ्रष्टाचार का दोषी नहीं ठहराया गया है, उन्हें मनमाने ढंग से उनके लोकतांत्रिक मताधिकार से वंचित न किया जाए।
जोजारी नदी में प्रदूषण मामले में SC ने सुनवाई एकत्रित करने का दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की जोजारी नदी में प्रदूषण के मामले में एनजीटी के आदेश के खिलाफ लंबित अपीलों को स्वत: संज्ञान मामले के साथ सुनवाई के लिए जोड़ने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि मामले में समान मुद्दे हैं, इसलिए सभी अपीलों को एक साथ सुना जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर को नदी में औद्योगिक अपशिष्ट गिरने पर स्वत: संज्ञान लिया था। इससे कई गांवों में पीने का पानी असुरक्षित हो गया और स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी प्रभावित हो रही है। बेंच ने बताया कि जोजारी नदी, लूनी और बांदी नदी क्षेत्र में फैली हैं। एनजीटी ने प्रदूषण रोकने के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाई थी, जिसे 2020 में अलग-अलग निगरानी समितियों में बदल दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सूक्ष्म स्तर पर कार्रवाई आवश्यक है क्योंकि औद्योगिक अपशिष्ट के कारण मानव और पशुओं के लिए पीने का पानी सुरक्षित नहीं है।
सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट्स केस- SC ने नहीं सुनी दिल्ली HC के फैसले के खिलाफ याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट्स, मुखर्जी नगर मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका को नहीं सुना। हाई कोर्ट ने सितंबर में आदेश दिया था कि अपार्टमेंट्स की ध्वस्तिकरण प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं होगी।
सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट्स 2010 में डीडीए द्वारा विकसित 12 ब्लॉकों वाला एक बहु-आवासीय प्रोजेक्ट है। इसमें 336 फ्लैट हैं, जिनमें 224 उच्च आय वर्ग और 112 मध्य आय वर्ग के लिए हैं। फ्लैटों में 2012 के बाद दीवारों की पपड़ी गिरने लगी और खंभों में दरारें दिखने लगीं। हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि डीडीए दो दिन के भीतर कैंप कार्यालय बनाए ताकि निवासी अपने फ्लैट खाली कर सकें। ध्वस्तिकरण में न्यूनतम असुविधा हो। निवासी अपने सामान, बाथरूम फिटिंग और इलेक्ट्रिकल आइटम ले जा सकते हैं। हाई कोर्ट ने 12 अक्टूबर तक फ्लैट खाली करने की समयसीमा दी है। दिसंबर 2024 में हाई कोर्ट की एक सिंगल जज बेंच ने भी डीएमसी के आदेश को सही ठहराते हुए कहा था कि डीडीए के पास निर्माण को ध्वस्त कर पुनर्निर्माण करने का अधिकार है।
आर्मस्ट्रांग हत्याकांड में आरोपपत्र रद्द करने के मद्रास HC के आदेश पर रोक
सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें तमिलनाडु के पूर्व बसपा अध्यक्ष के. आर्मस्ट्रांग की हत्या के मामले में तमिलनाडु पुलिस द्वारा दायर आरोपपत्र को रद्द कर दिया गया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने जांच सीबीआई को सौंपने के उच्च न्यायालय के निर्देश पर रोक नहीं लगाई। न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर चेन्नई के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया।
मामले में पीठ ने कहा, 'प्रतिवादी को नोटिस जारी किया जाए। इस बीच, आरोपपत्र रद्द करने के आदेश पर रोक रहेगी। हालांकि, जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने का निर्देश लागू रहेगा।' शीर्ष न्यायालय ने यह आदेश तब पारित किया जब तमिलनाडु सरकार की ओर से मामले में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि पुलिस ने एक व्यापक आरोपपत्र दायर किया था और उच्च न्यायालय ने इसे लापरवाही तरीके से रद्द कर दिया। उच्च न्यायालय ने 24 सितंबर को आर्मस्ट्रांग की हत्या की जांच सीबीआई को सौंप दी और संघीय एजेंसी को छह महीने में जांच पूरी करके संबंधित न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के तमिलनाडु अध्यक्ष आर्मस्ट्रांग की 5 जुलाई, 2024 को उनके चेन्नई स्थित आवास के पास हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अब तक 27 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय नाविक पर्ल मिलिंद को खेल कोटे से एमबीबीएस की सीट दे गोवा : शीर्ष कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गोवा को निर्देश दिया है कि वह भारत की अंतरराष्ट्रीय खेल नाविक पर्ल मिलिंद कोलवालकर को नीट (यूजी) 2025 में प्रवेश के लिए खेल कोटे के तहत एक मेडिकल सीट प्रदान करे। पर्ल मिलिंद ने शीर्ष कोर्ट में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ के 25 अगस्त के आदेश को चुनौती दी थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोवा राज्य सरकार के खेल कोटे के तहत पात्र मेधावी खिलाड़ियों को स्वतंत्रता सेनानी के बच्चों की श्रेणी के अंतर्गत रिक्त सीटें आवंटित करने के निर्णय को रद्द कर दिया था। जस्टिस पीएस नरसिंह और जस्टिस एएस चंदुरकर की बेंच ने अपने हालिया फैसले में हाईकोर्ट के आदेश में मेरिट के आधार पर हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया। लेकिन विशेष परिस्थितियों को देखते हुए याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि याचिकाकर्ता के लिए एक सीट रिजर्व करने के निर्देश को भविष्य में नजीर नहीं माना जाएगा।
शीर्ष कोर्ट ने कहा, हम हाईकोर्ट की तरफ से पारित आदेश में हस्तक्षेप के इच्छुक नहीं हैं। फिर भी, मामले की विशेष परिस्थितियों और पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया जाता है कि 1 अगस्त 2025 के विज्ञापन के अनुसार खेल कोटे के तहत एक सीट उस सीट से समायोजित की जाए जो खाली रह जाती। हाईकोर्ट ने 25 अगस्त के अपने आदेश में सरकार के 1 अगस्त के उस निर्णय के खिलाफ फैसला सुनाया था, जिसमें खेल कोटे के तहत पात्र मेरिटधारी खिलाड़ियों को सीटें आवंटित की गई थीं। हाईकोर्ट का कहना था कि यह निर्णय मनमाना है और प्रवेश प्रक्रिया के दौरान नियमों में अचानक बदलाव करने जैसा है।
भारत के बाहर की कंपनियां हमारे कामकाज को लेकर इतना चिंतित क्यों : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि भारत के बाहर की कंपनियां इस बात को लेकर इतनी चिंतित क्यों हैं कि हम अपना कामकाज कैसे करते हैं? इस सवाल के साथ शीर्ष अदालत ने वेदांता समूह की कंपनियों के खिलाफ अमेरिका स्थित एक शॉर्ट-सेलर के लगाए आरोपों की जांच की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएच चंदुरकर की पीठ ने वकील शक्ति भाटिया की ओर से दायर जनहित याचिका को वापस ले लिया मानते हुए खारिज कर दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि वह याचिका वापस ले लेंगे। केंद्र, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वायसराय रिसर्च एलएलसी एक शॉर्ट-सेलर है और याचिकाकर्ता सिर्फ उसके नाम पर काम करने वाले हैं। इसके बाद पीठ ने पूछा, भारत के बाहर की ये कंपनियां इस बात को लेकर इतनी चिंतित क्यों हैं कि हम अपना कामकाज कैसे और किस कानून के तहत करते हैं? मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के तुरंत बाद वायसराय की ओर से सेबी अध्यक्ष और अन्य अधिकारियों को लिखे गए ईमेल का हवाला देते हुए कहा कि इन संस्थाओं की बिल्कुल भी विश्वसनीयता नहीं है। उन्होंने कहा, एक व्यवस्थित पैटर्न है जहां बाहरी एजेंसियां रिपोर्ट बनाती हैं और भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित करती हैं। शंकरनारायणन ने कहा कि याचिका में मांगी गई राहत बहुत संकीर्ण है।
इसमें सिर्फ यह मांग की गई है कि सेबी और आरबीआई आरोपों की जांच करें और आवश्यक कार्रवाई करें। शंकरनारायणन ने यह भी कहा कि वह वायसराय के लगाए गए आरोपों या याचिकाकर्ता की ओर से अपनाई गई कार्यप्रणाली का समर्थन नहीं करते, बल्कि चिंताओं को दूर करना चाहते हैं। सेबी बताई गई अनियमितताओं की जांच कर सकता है और कानूनी कार्रवाई कर सकता है। पीठ ने कहा कि अगर वह नोटिस जारी करती है और उनसे जवाबी हलफनामा मांगती है, तो वह भारी कीमत चुकाकर याचिका खारिज कर देगी।