इस बीच स्पाइसजेट ने भी उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। विमानन कंपनी ने कोर्ट से मांग की है कि वह पट्टेदारों के भुगतान में विफल रहने पर तीन विमान इंजनों का उपयोग बंद करने संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर जल्द सुनवाई करे। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आश्वासन दिया है। कोर्ट ने स्पाइसजेट से कहा कि वह अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध करने वाला ई-मेल भेजे।
दिल्ली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने कहा था कि स्पाइसजेट ने बकाया भुगतान के लिए एक सहमत अंतरिम व्यवस्था का उल्लंघन किया है। खंडपीठ ने भुगतान न करने के कारण स्पाइसजेट को तीन इंजनों का इस्तेमाल बंद करने के एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा था। उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 14 अगस्त को स्पाइसजेट को 16 अगस्त तक तीन इंजनों का इस्तेमाल बंद करके उन्हें पट्टेदारों - ‘टीम फ्रांस 01 एसएएस’ और ‘सनबर्ड फ्रांस 02 एसएएस’ को सौंपने का निर्देश दिया था।
गणपति मूर्ति विसर्जन: एनजीटी के आदेश पर रोक
उच्चतम न्यायालय ने भगवान गणेश की मूर्ति के विसर्जन में शामिल होने वाले ढोल-ताशा समूहों में लोगों की संख्या 30 तक सीमित करने के एनजीटी के आदेश पर रोक लगाई। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने महाराष्ट्र सरकार, पुणे के अधिकारियों और अन्य को नोटिस जारी किया और कहा कि उन्हें ढोल, ताशा बजाने दें, यह पुणे के दिल में है।
इससे पहले कोर्ट ने भगवान गणेश की मूर्ति के विसर्जन में शामिल होने वाले 'ढोल-ताशा' समूहों में लोगों की संख्या 30 तक सीमित करने के राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई के लिए गुरुवार को सहमति जताई थी।पीठ ने एक वकील की दलीलों पर गौर किया, जिन्होंने पूछा था कि लोगों की संख्या कैसे सीमित की जा सकती है। एनजीटी ने ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से गणपति विसर्जन में शामिल ढोल-ताशा समूह में लोगों की संख्या 30 तक सीमित कर दी थी।
'गणेश चतुर्थी' का त्योहार सात सितंबर से शुरू हुआ और यह 10-11 दिन तक मनाया जाता है। महाराष्ट्र के कुछ भागों में 'ढोल-ताशा' समूह पारंपरिक त्योहारों का अभिन्न हिस्सा रहे हैं।