दुष्कर्म के मामलों को वास्तविक प्रेम संबंध के मामलों से अलग किया जाए: सुप्रीम कोर्ट
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को दुष्कर्म और वयस्कता की ओर बढ़ रहे युवाओं से जुड़े वास्तविक प्रेम संबंधों के मामलों के बीच अंतर करने की आवश्यकता पर जोर दिया। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने सह-शिक्षा संस्थानों और विश्वविद्यालयों के अस्तित्व का उल्लेख करते हुए कहा कि अब उनमें एक-दूसरे के लिए भावनाएं विकसित होती हैं। क्या आप कह सकते हैं कि प्यार करना अपराध है? हमें दुष्कर्म आदि जैसे आपराधिक कृत्य और इससे अंतर रखना होगा। पीठ ने कहा कि जब वास्तविक प्रेम संबंध होते हैं, तो वे एक-दूसरे को पसंद करते हैं और वे शादी करना चाहते हैं। ऐसे मामलों को आपराधिक मामलों के समान न समझें। आपको समाज की वास्तविकता को ध्यान में रखना होगा। पीठ ने कहा कि यह समाज की कठोर वास्तविकता है। घर से भागने की घटनाओं को छिपाने के लिए भी पोक्सो अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए जाते हैं।
पलियेक्कारा प्लाजा पर टोल वसूली रोकने का केरल हाईकोर्ट का आदेश बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और त्रिशूर के पलियेक्कारा टोल प्लाजा का संचालन करने वाले कंसेसियनार की केरल हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ याचिकाएं खारिज कर दी हैं, जिसमें चार हफ्तों के लिए टोल वसूली रोकने का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोग पहले ही टैक्स चुका चुके हैं, इसलिए उनसे खराब और गड्ढों वाली सड़कों पर चलने के लिए दोबारा पैसे नहीं लिए जा सकते। मंगलवार शाम को अपलोड किए गए एक आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और जोर देकर कहा कि जब प्रशासनिक चूक और सड़कों की खराब स्थिति के कारण जनता को लंबे समय तक असुविधा हो रही हो, तो नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को व्यावसायिक हितों से ज्यादा अहमियत दी जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने आदेश दिया, 'नागरिकों को उन सड़कों पर चलने की आजादी दी जाए, जिनके इस्तेमाल के लिए उन्होंने पहले ही टैक्स चुका दिया है, और उन्हें नालियों और गड्ढों से बचने के लिए और टैक्स नहीं देना होगा, जो अकुशलता के प्रतीक हैं।' पीठ ने उच्च न्यायालय की टिप्पणियों और निष्कर्षों से सहमति व्यक्त की।
इंदौर के कार्टूनिस्ट पीएम और संघ से मांगेंगे माफी, सोशल मीडिया पर लिखेंगे माफीनामा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इंदौर के कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस के खिलाफ बनाए गए आपत्तिजनक कार्टून मामले में दी गई गिरफ्तारी से सुरक्षा को बढ़ा दिया। साथ ही अदालत ने मालवीय को आदेश दिया है कि वह दस दिन के भीतर फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर माफी प्रकाशित करें। इससे पहले शीर्ष अदालत ने मालवीय को हलफनामे के रूप में हिंदी में माफीनामा दायर करने का निर्देश दिया था। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि माफी प्रकाशित करने की शर्त पर अंतरिम सुरक्षा को अगली सुनवाई तक बढ़ाया जाता है। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि जांच चल रही है, इसलिए विवादित पोस्ट को डिलीट नहीं किया जाना चाहिए। मालवीय भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का लिखित आश्वासन दें।