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SC: ED निदेशक संजय मिश्रा के तीसरे कार्यकाल विस्तार को दी गई चुनौती, पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें

Thu, 01 Dec 2022 08:52 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक के रूप में संजय कुमार मिश्रा को दिए गए कार्यकाल के तीसरे विस्तार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इसके अलावा भी कई मामलों में आज शीर्ष अदालत में सुनवाई हुई। पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें...
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक के रूप में संजय कुमार मिश्रा को दिए गए कार्यकाल के तीसरे विस्तार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इसके अलावा भी कई मामलों में आज शीर्ष अदालत में सुनवाई हुई। जहां अदालत ने जल्लीकट्टू को लेकर तमिलनाडु सरकार से सवाल किया। वहीं, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि परिसीमन आयोग के पास जम्मू-कश्मीर में निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से बनाने का अधिकार है। पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की आज की प्रमुख खबरें..

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संजय मिश्रा के कार्यकाल विस्तार के खिलाफ दाखिल हुई याचिका
प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक के रूप में संजय कुमार मिश्रा को दिए गए कार्यकाल के तीसरे विस्तार को चुनौती देते हुए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस याचिका में आरोप लगाया है कि ईडी निदेशक के कार्यकाल का विस्तार हमारे देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट कर रहा है।

जल्लीकट्टू - फोटो : सोशल मीडिया
जल्लीकट्टू पर तमिलनाडु सरकार से मांगा जवाब
जल्लीकट्टू की अनुमति देने वाले तमिलनाडु के कानून को दी गई चुनौती की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार से पूछा है कि देशी नस्ल के सांडों के संरक्षण के लिए जल्लीकट्टू कैसे जरूरी है। इतना ही नहीं, न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने राज्य सरकार से यह भी पूछा कि क्या किसी जानवर का इस्तेमाल "जल्लीकट्टू" की तरह मनुष्यों के मनोरंजन के लिए किया जा सकता है? 

पीठ के सवालों का जवाब देते हुए तमिलनाडु की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शीर्ष अदालत को बताया कि "जल्लीकट्टू" अपने आप में मनोरंजन नहीं है। साथ ही जो व्यक्ति अपने बैल का प्रदर्शन करता है वह अपने बैल की बहुत देखभाल और उससे प्यार करता है। सुनवाई के दौरान जब वरिष्ठ अधिवक्ता सिब्बल ने कहा कि यह खेल मनोरंजन के लिए नहीं है। इसे ऐतिहासिक रूप से भी देखा जाना चाहिए। इसके बाद पीठ ने पलटवार करते हुए पूछा कि मनोरंजन नहीं? फिर लोग वहां क्यों इकट्ठा हो रहे हैं? इस पर उन्होंने जवाब दिया कि इसका एक उद्देश्य बैल की शक्ति को प्रदर्शित करना भी है कि आपने इसे कैसे पाला है और यह भी कि यह कितना मजबूत है। साथ ही इससे बाजार में सांड की कीमत बढ़ जाती है।

गौरतलब है कि जल्लीकट्टू" को "एरुथाझुवुथल" के रूप में भी जाना जाता है। तमिलनाडु में पोंगल फसल उत्सव के हिस्से के रूप में इसका आयोजन किया जाता है। 

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
 परिसीमन आयोग को जम्मू-कश्मीर में निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से बनाने का अधिकार
केंद्र ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के लिए गठित परिसीमन आयोग को में विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण करने का अधिकार है। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को परिसीमन आयोग के गठन के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए ये जानकारी दी। इसके साथ ही परिसीमन आयोग के गठन के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करने की मांग की। उन्होने अदालत को बताया कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन आयोग की स्थापना को रोकता नहीं है। 

सॉलिसिटर जनरल ने याचिकाकर्ताओं की इस दलील का भी विरोध किया कि संविधान के अनुच्छेद 170 ने 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन पर रोक लगा दी है।

सरसों - फोटो : बसीत जरगर
क्या जीएम सरसों को पर्यावरण में रिलीज किए जाने का कोई बाध्यकारी कारण है?   
जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) सरसों को पर्यावरण में रिलीज किए जाने का विरोध करने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या जीएम सरसों को पर्यावरण के लिए जारी करने का कोई अनिवार्य कारण है। 

केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि कार्यकर्ताओं, विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों द्वारा जीएम फसलों का विरोध वैज्ञानिक तर्क पर आधारित होने के बजाय वैचारिक है। इस पर शीर्ष अदालत ने कहा कि भारतीय किसान पश्चिमी देशों के विपरीत साक्षर नहीं हैं। वे कृषि मेला और कृषि दर्शन जैसे आयोजनों के बावजूद जीन और म्यूटेशन के बारे में नहीं समझते हैं। ये जमीनी हकीकत है। जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस बी वी नागरत्ना की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से कहा कि जिस सवाल का जवाब दिया जाना चाहिए वह यह है कि क्या जीएम सरसों के पर्यावरणीय रिलीज के साथ कोई अपरिवर्तनीय परिणाम होगा।

25 अक्टूबर को, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के तहत जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (GEAC) ने ट्रांसजेनिक सरसों हाइब्रिड DMH-11 और बार्नेज, बारस्टार और बार जीन वाली पैरेंटल लाइन्स के पर्यावरणीय रिलीज को मंजूरी दे दी ताकि उनका उपयोग नए संकर विकसित करने के लिए किया जा सके।
 
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कोर्ट का फैसला - फोटो : amar ujala
आम्रपाली समूह के पूर्व वैधानिक लेखा परीक्षक की चिकित्सा जमानत की अवधि बढ़ाई
आम्रपाली समूह की कंपनियों के पूर्व सांविधिक लेखापरीक्षक अनिल मित्तल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस संजय किशन कौल और अभय एस ओका की पीठ ने उनकी चिकित्सकीय जमानत की अवधि बृहस्पतिवार को बढ़ा दी है। सुनवाई के दौरान पीठ ने एम्स द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड द्वारा दायर याचिकाकर्ता अनिल मित्तल की रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया। 
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