भाजपा नेता और राज्यसभा सांसद नारायण राणे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। दरअसल, हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते ही बीएमसी को आदेश दिया था कि राणे के बंगले में चल रहे अनधिकृत निर्माण को ध्वस्त कर दिया जाए। इसके अलावा राणे पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इसी के खिलाफ राणे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने राणे की याचिका को रद्द करते हुए कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराया। हालांकि, कोर्ट ने राणे को तीन महीने का समय देते हुए कहा कि वे इस दौरान बंगले के अनधिकृत निर्माण को कानून के दायरे में ला सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अगर तीन महीने में राणे ऐसा नहीं कर पाते तो हाईकोर्ट का फैसला लागू होगा।
राणे ने बीएमसी के नोटिस को रद्द करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का किया था रुख
राणे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के नोटिस को रद्द करने की मांग की थी। राणे ने याचिका में बीएमसी की तरफ से 25 फरवरी, चार मार्च और 16 मार्च को दिए गए नोटिस को विकृत, अवैध और मूल अधिकारों का उल्लंघन बताया था। राणे के वकील अमोघ सिंह ने जस्टिस ए सैयद की पीठ के समक्ष याचिका पर शीघ्र सुनवाई की अपील की थी। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने अवैध निर्माण को तोड़ने पर कुछ दिन के लिए रोक लगा दी थी। हालांकि अब उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है।
जानें क्या था अनधिकृत निर्माण?
नोटिस में बंगले के भूतल और आठ मंजिलों में से सात में अनधिकृत तौर पर बदलाव किए जाने का उल्लेख किया गया है। बीएमसी के एक अधिकारी का कहना है कि पहली मंजिल से लेकर 8वीं मंजिल (7वीं मंजिल छोड़कर) तक बगीचे की जगह रूम बनवाए गए हैं जबकि नियम के मुताबिक आठ मंजिला बंगले के सभी फ्लोर पर बगीचे का क्षेत्र होना आवश्यक है।