सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा सेवा से बर्खास्त किए जाने को चुनौती देने वाली एक पूर्व वैज्ञानिक की याचिका खारिज करते हुए कहा है कि रॉकेट विज्ञान से जुड़े शोध करने वाले दक्षिण कोरियाई संस्थान के साथ उसके अनधिकृत जुड़ाव के कारण अंतरिक्ष एजेंसी का उसकी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा पर संदेह करना उचित था।
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सुप्रीम कोर्ट तिरुवनंतपुरम में इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के पूर्व वैज्ञानिक वी. आर. सनल कुमार की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई कर रही थी। वैज्ञानिक ने सेवा से बर्खास्त करने के आदेश को याचिका में चुनौती दी थी, जिसे केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) और केरल उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा था।
वर्ष 1992 में इसरो में शामिल होने वाले कुमार को अपने नियोक्ता की इजाजत के बिना दक्षिण कोरियाई विश्वविद्यालय से जुड़ने और प्रोफेसर एच. डी. किम की सहायता करने के कारण एक सितंबर 2003 को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया था।
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कैट और केरल हाईकोर्ट के फैसलों को बरकरार रखते हुए न्यायमूर्ति एम.आर. शाह और न्यायमूर्ति सी. टी. रविकुमार की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के अनधिकृत जुड़ाव के कारण नियोक्ता द्वारा उसकी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा पर संदेह करना उचित था।