सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना में वकील दंपति की हत्या के मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया है। वकील दंपति की हत्या साल 2021 में तेलंगाना के पेदापल्ली जिले में हुई थी। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह ने जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया। जांच सीबीआई को सौंपने के लिए याचिका वकील गट्टू वामन राव के पिता गट्टू किशन राव ने दायर की थी। गट्टू वामन राव के साथ ही उनकी पत्नी पीवी नागमनी की भी हत्या कर दी गई थी।
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दंपति तेलंगाना उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करते थे। आरोपियों ने चाकू और अन्य धारदार हथियारों से रामगिरि मंडल के एक गांव में दंपति की गाड़ी पर हमला किया था और हमले के बाद मौके से फरार हो गए थे। दंपति ने पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति की मौत के मामले में अदालत में याचिका दायर की थी। इस मामले में दंपति ने आरोप लगाया था कि पुलिस द्वारा उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। दंपति ने कई अन्य मुद्दों पर भी अलग-अलग अदालतों में याचिका दायर की हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धार्थ वरदराजन को दी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन को राहत देते हुए असम पुलिस द्वारा उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने पर रोक लगा दी। वरदराजन ने ऑपरेशन सिंदूर पर एक लेख लिखा था, जिसे लेकर उनके खिलाफ असम में एफआईआर दर्ज की गई थी।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह निर्देश दिया। याचिका में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। धारा 152 'भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य' से संबंधित है। फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म द्वारा ही वेब पोर्टल 'द वायर' का संचालन किया जाता है। शीर्ष अदालत ने फाउंडेशन के सदस्यों और वरदराजन से मामले की जांच में सहयोग करने को कहा।
भाजपा नेता ने राहुल गांधी को बताया 'आवारा राजनेता'
महाराष्ट्र के भाजपा नेता राज पुरोहित ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को 'घूमता हुआ आवारा राजनेता' कहा। राज पुरोहित का यह बयान तब सामने आया, जब राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश की आलोचना की। पुरोहित ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फोकस कर लोगों का ध्यान असली राष्ट्रीय मुद्दों से भटका रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश कि दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को हटाकर आश्रय गृह में भेजा जाए, एक ऐसा फैसला है जो दशकों से चली आ रही मानवीय और वैज्ञानिक नीतियों के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार से पूछा- अवैध खनन रोकने के लिए क्या कदम उठाए?
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मेघालय सरकार को निर्देश दिया कि वह राज्य के खासी हिल्स में अवैध खनन गतिविधियों को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी के साथ हलफनामा चार हफ्ते के भीतर पेश करे। मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ को वरिष्ठ वकील के परमेश्वर ने बताया कि राज्य के साफ-सुथरे और शांत जंगल वाले इलाकों में खनन गतिविधियां तेजी से चल रही हैं। वह इस मामले में न्याय मित्र के रूप में कोर्ट की मदद कर रहे हैं। असम सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि मेघालय में अवैध खनन की वजह से असम में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो रही है, जिससे लोगों को भारी परेशानी हो रही है।
कोर्ट ने कहा, हम मेघालय सरकार को अंतिम मौका देते हैं। चार हफ्ते के भीतर यह हलफनामा पेश करें कि अवैध खनन रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। न्याय मित्र ने यह भी कहा कि केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने खुद इलाके का दौरा किया और वहां व्यापक स्तर पर अवैध खनन देखा। उन्होंने कहा कि मेघालय सरकार ने इस मामले में सीईसी को कोई जवाब नहीं दिया। मेघालय सरकार के वकील ने बताया कि 18 जुलाई को सीईसी ने स्थल निरीक्षण किया था और इसके बाद राज्य को सवालों की एक सूची सौंपी गई थी, जिसका जवाब राज्य सरकार ने दे दिया था। हालांकि कोर्ट ने यह नोट किया कि सीईसी को वह जवाब अब तक नहीं मिला है।
सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त जिला जज की नियुक्ति पर सवाल संविधान पीठ को भेजा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यह सवाल पांच जजों की संविधान पीठ को भेजा कि क्या जज बनने से पहले वकालत में सात साल पूरे करने वाला कोई न्यायिक अधिकारी अतिरिक्त जिला जज बनने का हकदार है, अगर उस पद पर रिक्ति हो। शीर्ष कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जिला जज बनने के लिए योग्यता की जांच नियुक्ति के समय करनी चाहिए या आवेदन के समय या दोनों समय पर। मुख्य न्यायाधीश बी आर गावई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन व एन. वी. अंजरिया की पीठ ने कहा कि ये दोनों मुद्दे संविधान के अनुच्छेद 233(2) की व्याख्या से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न हैं। अनुच्छेद 233 जिला जज की नियुक्ति से संबंधित है।
सुप्रीम कोर्ट में सवाल – क्या सजा पा चुके नेता राजनीतिक पार्टी चला सकते हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह इस मुद्दे पर विचार करेगा कि क्या किसी नेता को केवल सजा मिलने और वोट देने से अयोग्य होने के आधार पर राजनीतिक पार्टी का नेतृत्व करने से रोका जा सकता है या नहीं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस मामले को एक 'दिलचस्प सवाल' बताया। यह याचिका साल 2017 में दाखिल की गई थी। कोर्ट ने कहा कि यह सवाल विचार करने लायक है कि क्या कोई सांविधानिक अदालत यह निर्देश दे सकती है कि भले ही किसी व्यक्ति को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत संगठन बनाने का अधिकार है, लेकिन वह केवल इस वजह से राजनीतिक संगठन नहीं बना सकता क्योंकि उसे वोट देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने अश्विनी उपाध्याय की ओर से दाखिल जनहित याचिका की अगली सुनवाई की तारीख 19 नवंबर तय की है।