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Supreme Court: महिलाओं के प्रजनन अधिकार मामले पर सुनवाई, केंद्र को मिला चार सप्ताह का समय

Mon, 16 Jan 2023 10:49 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अधिनियम के अनुसार, जब तक गर्भवती महिला की आयु 35 वर्ष से अधिक न हो, प्रसव पूर्व निदान तकनीक का उपयोग या संचालन नहीं किया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने गर्भधारण और प्रसव से पूर्व निदान परीक्षण के लिए महिलाओं पर आयु प्रतिबंध के खिलाफ याचिका पर सोमवार को सुनवाई की। कोर्ट ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है। न्यायमूर्ति एसके कौल और एएस ओका की पीठ ने कहा है कि प्रतिवादी ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा है। साथ ही शीर्ष अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए आठ सप्ताह बाद की तारीख तय की है। 

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याचिका में गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) अधिनियम, 1994 की धारा 4(3)(i) में 35 वर्ष की आयु सीमा महिलाओं के प्रजनन अधिकारों पर प्रतिबंध का हवाला दिया गया है। अधिनियम के अनुसार, जब तक गर्भवती महिला की आयु 35 वर्ष से अधिक न हो, प्रसव पूर्व निदान तकनीक का उपयोग या संचालन नहीं किया जाएगा।

पहले भी गर्भपात पर आया था फैसला 
महिलाओं के प्रजनन अधिकारों पर एक महत्वपूर्ण फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि सभी महिलाएं गर्भावस्था के 24 सप्ताह तक सुरक्षित और कानूनी गर्भपात की हकदार हैं, और अपनी वैवाहिक स्थिति के आधार पर कोई भी भेद कर सकती हैं। 

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गूगल इंडिया को नहीं मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत, अब 18 को सुनवाई 
1337 करोड़ रुपये के भारी भरकम जुर्माना झेल रही गूगल इंडिया को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने कहा है कि वह नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के आदेश के खिलाफ गूगल की याचिका पर 18 जनवरी को सुनवाई करेगा। एनसीएलएटी ने गूगल पर कॉम्पिटीशन कंपनी ऑफ इंडिया द्वारा लगाए गए 1337 करोड़ के जुर्माने पर अंतरिक रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि क्या गूगल इंडिया, भारत में उसी नियम का पालन करेगा जैसा कि वह यूरोप में एंड्रॉइड-आधारित मोबाइल स्मार्टफोन में पहले से इंस्टॉल किए गए ऐप के संबंध में करता है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ ने गूगल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम सिंघवी से अगली सुनवाई में इस पहलू को स्पष्ट करने के लिए कहा।


आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना मामले पर याचिका का निस्तारण 
सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना की दिल्ली पुलिस आयुक्त के तौर पर नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका का सोमवार को निस्तारण कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ ने हालांकि, कानूनी मुद्दे को खुला रखा। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस कानूनी मुद्दे से निपटेगी कि क्या राज्यों में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति की प्रक्रिया निर्धारित करने वाला उसका फैसला दिल्ली पुलिस आयुक्त पर भी लागू होगा बता दें, 1984 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी अस्थाना को सेवानिवृत्त से चार दिन पहले दिल्ली पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया था। उन्हें एक साल के लिए गुजरात कैडर से केंद्र शासित प्रदेश कैडर में स्थानांतरित किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के न्यायिक सदस्य का कार्यकाल बढ़ाया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भोपाल में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सेंट्रल जोन बेंच के एक न्यायिक सदस्य का कार्यकाल बढ़ा दिया। बता दें, न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति एसके सिंह सोमवार को सेवानिवृत्त होने वाले थे। पीठ ने कहा, जब तक न्यायिक सदस्यों के चयन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती है और नए न्यायिक सदस्य पदभार ग्रहण नहीं कर लेते हैं, तब तक न्यायमूर्ति एसके सिंह पद पर बने रहेंगे।
 

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धर्मांतरण: सभी हाईकोर्ट से मामलों को स्थानांतरित करने के लिए समान याचिका करें दायर

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कई राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों को चुनौती देने वाले पक्षकारों से कहा कि वे इस मुद्दे पर विभिन्न हाईकोर्टों से शीर्ष अदालत में मामलों को स्थानांतरित करने के लिए एक समान याचिका दायर करें।

पीठ ने कहा कि विभिन्न हाईकोर्टों के समक्ष लंबित मामलों के मद्देनजर, इस अदालत के समक्ष सभी मामलों को टैग करने और स्थानांतरित करने के लिए इस अदालत के समक्ष एक स्थानांतरण याचिका दायर की जाए। मामलों को दो हफ्ते बाद सूचीबद्ध किया जाता है।
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