सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर चुटकुलों केकारण सिख समुदाय आहत हो रहा है या उन्हें परेशानी हो रही है तो इस पर जरूर विचार किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि अगर व्यावसायिक लाभ केलिए सिखों पर बने चुटकुलों का इस्तेमाल हो रहा है तो वह इस पर कार्रवाई कर सकती है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरुवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की उस याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है, जिसमें सिख समुदायों पर बनने वालों चुटकुलों पर रोक लगाने की गुहार की गई है। पीठ ने इस याचिका को दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और एक महिला वकील द्वारा दाखिल याचिकाओं के साथ सुनवाई का निर्णय लिया है। तीनों ही याचिकाओं पर पांच अप्रैल को सुनवाई होगी।
पीठ ने एसजीपीसी की ओर से पेश वकील सतिन्दर सिंह गुलाटी से उन बिंदुओं का उल्लेख करने के लिए कहा है, जिन पर अदालत आदेश पारित कर सकता है। पीठ ने कहा कि हम आपकी भावनाओं को समझते हैं। हम आपके लिए कुछ करना चाहते हैं। पीठ ने कहा कि अगर चुटकुलों के कारण पूरा समुदाय आहत है तो हम निश्चय ही इस पर गौर करेंगे। गुलाटी ने पीठ से कहा कि खास भाषा और धर्म के कारण समाज में सिखों के साथ भेदभाव हो रहा है। समाज में यह अवधारणा बन गई है।
गुलाटी ने यह भी कहा कि इस कारण सिख समुदाय के लोगों को नौकरी में भी परेशानी आ रही है। इंटरव्यू बोर्ड में बैठा व्यक्ति सिख आवेदक की बुद्धिमता को लेकर पूर्वाग्रह से ग्रस्त रहता है। यह सब चुटकुलों की वजह से हो रहा है। याचिका में कहा गया है कि सिखों पर बनने वाले चुटकुलों पर रोक लगनी चाहिए खासकर वेबसाइट द्वारा किए जा रहे चुटकुलों के प्रचार-प्रसार पर। इस पर पीठ ने कहा कि चूंकि कमेटी सिख समुदाय केअधिकतर लोगों का प्रतिनिधित्व करती है, लिहाजा इस पर जरूर विचार किया जाएगा।
फरवरी में शीर्ष अदालत ने इस मसले पर मांगे थे सुझाव
मालूम हो कि गत 16 फरवरी को दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और महिला वकील हरविन्दर चौधरी की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने यह जानना चाहा है कि न्यायिक दायरे में रहते हुए वेबसाइट्स पर सिखों पर चुटकुलों पर पाबंदी कैसे लगाई जा सकती है। पीठ ने कहा था ‘हम नहीं चाहते है कि कोई आपका उपहास उड़ाए। कृपया हमें यह बताइए कि हम आपके लिए क्या कर सकते है।’ अदालत ने उन्हें सुझाव देने केलिए कहा था।