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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट जज के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई 18 को, एसीबी को बताया था 'उगाही केंद्र'

Sat, 16 Jul 2022 04:12 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

12 जुलाई को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने कर्नाटक सरकार की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता और एसीबी के एडीजीपी के वकील के प्रतिवेदन पर गौर किया था। इसके बाद पीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायाधीश से सुनवाई स्थगित करने को कहा था। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उच्चतम न्यायालय, कर्नाटक के एडीजीपी सीमांत कुमार सिंह और आईएएस अधिकारी जे मंजूनाथ की याचिका पर 18 जुलाई को सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, कृष्ण मुरारी और हिमा कोहली की पीठ सोमवार को इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 12 जुलाई को कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायाधीश एचपी संदेश को एक जमानत याचिका पर सुनवाई तीन दिन रोकने का निर्देश दिया था। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस संदेश ने कर्नाटक के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो 'एसीबी' और उसके एडीजीपी सीमांत कुमार सिंह के खिलाफ कथित 'प्रतिकूल' टिप्पणियां की थीं। जिसके बादएडीजीपी सीमांत कुमार सिंह और आईएएस अधिकारी जे मंजूनाथ ने हाईकोर्ट के जज की 'प्रतिकूल टिप्पणी' के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 

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12 जुलाई को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने कर्नाटक सरकार की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता और एसीबी के एडीजीपी के वकील के प्रतिवेदन पर गौर किया था। इसके बाद पीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायाधीश से सुनवाई स्थगित करने को कहा था। 

एडीजीपी ने अपनी याचिका में उन प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने का अनुरोध किया है, जो जस्टिस संदेश ने जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की थीं। न्यायमूर्ति संदेश ने कर्नाटक एसीबी को 'उगाही केन्द्र' और उसके प्रमुख सिंह को 'दागदार अधिकारी' कहा था।
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बाद में 11 जुलाई को हाईकोर्ट के जस्टिस संदेश ने एक आदेश भी सुनाया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उन्हें स्थानांतरण की धमकी दी गई है और उन्हें यह धमकी एक अन्य न्यायाधीश के जरिये दी गई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था 'हमारा मानना है कि विद्वान न्यायाधीश से मामले की सुनवाई तीन दिन के लिए स्थगित करने को कहना उचित है। इस दौरान हमें 11 जुलाई को न्यायाधीश की ओर से पारित आदेश को देखने का मौका मिलेगा।

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