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SIR: बंगाल में एसआईआर के खिलाफ याचिका पर कल सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, सीएम ममता बनर्जी के मौजूद रहने की संभावना

Tue, 03 Feb 2026 10:28 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ममता बनर्जी ने 28 जनवरी को अपनी याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पक्षकार बनाया है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिखकर चुनावी राज्य में चल रहे मनमाने और त्रुटिपूर्ण एसआईआर को रोकने की मांग की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि मौजूदा स्वरूप में एसआईआर जारी रहने से बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने की स्थिति पैदा हो सकती है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट बुधवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करेगा। इस अहम सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खुद अदालत में मौजूद रहने की भी संभावना जताई जा रही है।
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सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली भी शामिल होंगे। पीठ ममता बनर्जी, मोस्तारी बानो तथा तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन द्वारा दायर याचिकाओं समेत याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करेगी।

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क्या सुप्रीम कोर्ट में दलीलें पेश करेंगी ममता बनर्जी?
सूत्रों के मुताबिक, एलएलबी की डिग्री रखने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद भी अदालत में मौजूद रहकर अपनी दलीलें रख सकती हैं। इससे पहले 19 जनवरी को शीर्ष अदालत ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कई निर्देश जारी किए थे। अदालत ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और इससे आम लोगों को किसी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' सूची में शामिल मतदाताओं के नाम ग्राम पंचायत भवनों और प्रखंड कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएं, जहां दस्तावेज और आपत्तियां भी जमा की जा सकें।

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क्या है लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी?
लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी में वर्ष 2002 की मतदाता सूची से संबंधित वंशानुक्रम जोड़ने में विसंगतियां शामिल हैं, जिनमें माता-पिता के नाम में अंतर या मतदाता और उनके अभिभावक के बीच आयु का अंतर 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक होना शामिल है।

मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने यह भी कहा था कि राज्य में करीब 1.25 करोड़ मतदाता इस लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी सूची में शामिल हैं। अदालत ने निर्देश दिया था कि दस्तावेज और आपत्तियां जमा करने के लिए पंचायत भवनों या प्रखंड कार्यालयों में कार्यालय स्थापित किए जाएं और राज्य सरकार चुनाव अधिकारियों को पर्याप्त जनशक्ति उपलब्ध कराए।

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