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अयोध्या पर मध्यस्थता कारगर नहीं, पक्षकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू

Thu, 11 Jul 2019 06:46 AM IST
अमर शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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सुप्रीम कोर्ट राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले की सुनवाई की तारीख जल्द लगाने की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करेगा। यह आवेदन मामले के एक हिंदू पक्षकार गोपाल सिंह विशारद की ओर से दिया गया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ आवेदन पर गुरुवार सुबह 10:30 बजे सुनवाई करेगी।

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मंगलवार को विशारद की ओर से चीफ जस्टिस के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए सुनवाई की तारीख जल्द लगाने की मांग की गई थी। उनका कहना है कि विवाद निपटाने में मध्यस्थता प्रक्रिया से खास प्रगति नहीं है, लिहाजा इसे मेरिट के आधार पर सुना जाए और निपटारे के लिए तारीख लगाई जाए। इस पर चीफ जस्टिस ने उन्हें आवेदन दाखिल करने को कहा था। 

मालूम हो कि कोर्ट ने इस मामले का आपसी बातचीत से हल निकालने के लिए पूर्व जज एफएमआई कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल का गठन किया था। गौरतलब है कि कोर्ट ने बातचीत से समाधान की संभावना तलाशने के लिए पूर्व जज एफएमआई कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल का गठन किया है।
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विशारद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पीएस नरसिंहा ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्यस्थता प्रक्रिया के पहले चरण में खास प्रगति नहीं हुई है। इसलिए वह चाहते हैं कि मामले का निपटारा करने के लिए तारीखें लगाई जाएं। जिसके बाद पीठ ने उन्हें आवेदन दाखिल करने की इजाजत दी।

मध्यस्थता के लिए 15 अगस्त तक समय

सुप्रीम कोर्ट ने इसी वर्ष 10 मई को मध्यस्थता पैनल को मामले सुलझाने के लिए 15 अगस्त तक का वक्त दिया था। पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष पेश रिपोर्ट में मध्यस्थता पैनल ने सकारात्मक परिणाम को लेकर आशा जताते हुए कुछ और वक्त मांगा था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। पीठ ने कहा था कि यह मामला वर्षों से लंबित है, ऐसे में पैनल को और वक्त देने में कोई हर्ज नहीं है।

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