फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SC: समाधान पेशेवरों पर 'लोक सेवक' के रूप में मुकदमा चलेगा या नहीं, सुप्रीम कोर्ट करेगा जांच, CBI को नोटिस

Sat, 01 Jul 2023 04:45 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की अवकाश पीठ ने झारखंड उच्च न्यायालय के पांच अप्रैल के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ एक याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा है। झारखंड उच्च न्यायालय ने कहा है कि दिवाला और दिवालियापन संहिता के तहत नियुक्त समाधान पेशेवर एक 'लोक सेवक' है और उस पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।

विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की अवकाश पीठ ने झारखंड उच्च न्यायालय के पांच अप्रैल के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया है।याचिका में कहा गया है कि विशेष अनुमति याचिका पर प्रतिवादी को नोटिस जारी करें। शीर्ष अदालत झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली संजय कुमार अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिका में कहा गया है, वर्तमान याचिका कानून पर एक बड़ा सवाल उठाती है जिसके भारत के क्षेत्र में विभिन्न अदालतों के समक्ष लंबित विभिन्न कार्यवाहियों में दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। क्या दिवाला और दिवालियापन संहिता के तहत नियुक्त एक समाधान पेशेवर, पीसी अधिनियम के तहत परिभाषित एक लोक सेवक है, और इस प्रकार पीसी अधिनियम के तहत कार्यवाही और अभियोजन के अधीन हो सकता है।
विज्ञापन


उच्च न्यायालय ने माना था कि एक समाधान पेशेवर पीसी अधिनियम की धारा 2 (बी) के अर्थ के तहत 'सार्वजनिक कर्तव्य' का पालन करता है और इसलिए वह एक 'लोक सेवक' है, जिसके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है। समाधान पेशेवरों की नियुक्ति राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण द्वारा की जाती है, जो आई एंड बी कोड, 2016 के तहत कंपनियों की दिवाला समाधान प्रक्रिया के लिए निर्णायक प्राधिकरण है। रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (समाधान पेशेवर) की दिवाला समाधान प्रक्रिया में और कॉर्पोरेट देनदारों की संपत्ति की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

हाईकोर्ट ने कहा था, समाधान पेशेवर के कार्यभार की प्रकृति और किए जाने वाले कर्तव्य से उसके कार्यालय में उन कार्यों का निष्पादन शामिल होता है जो सार्वजनिक कर्तव्य की प्रकृति में होते हैं और इसलिए पीसी अधिनियम की धारा 2 (सी) (वी) और (viii) दोनों के तहत लोक सेवक के अर्थ में आएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें