फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Supreme Court: CEC और ECs की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम जैसी प्रणाली की मांग, सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला

Thu, 02 Mar 2023 03:25 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने पिछले साल 24 नवंबर को इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शीर्ष अदालत ने पूर्व नौकरशाह अरुण गोयल को निर्वाचन आयुक्त नियुक्त करने में केंद्र द्वारा दिखाई गई जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उनकी फाइल 24 घंटे में विभागों से बिजली की गति से पास हो गई।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और निर्वाचन आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम जैसी व्यवस्था बनाने की मांग करने वाली याचिकाओं पर आज अपना फैसला सुनाएगा। न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ गुरुवार को अपना फैसला सुना सकती है। पीठ में न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस, न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार शामिल हैं। पीठ ने पिछले साल 24 नवंबर को इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

विज्ञापन


शीर्ष अदालत ने पूर्व नौकरशाह अरुण गोयल को निर्वाचन आयुक्त नियुक्त करने में केंद्र द्वारा दिखाई गई जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उनकी फाइल 24 घंटे में विभागों से बिजली की गति से पास हो गई। हालांकि, केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत की टिप्पणियों का जोरदार विरोध किया था। अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने तर्क दिया था कि उनकी नियुक्ति से संबंधित पूरे मामले को संपूर्णता से देखने की जरूरत है।

शीर्ष अदालत ने पूछा था कि केंद्रीय कानून मंत्री ने चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री को सिफारिश की गई चार नामों के एक पैनल को कैसे चुना, जबकि उनमें से किसी ने भी कार्यालय में निर्धारित छह साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया है। चुनाव आयोग अधिनियम, 1991 के तहत चुनाव आयोग का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, लागू हो सकता है।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त के रूप में अरुण गोयल की नियुक्ति पर दखल दिया था। अदालत ने चुनाव आयुक्त के तौर पर अरुण गोयल की नियुक्ति से संबंधित मूल रिकॉर्ड मांगे थे। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से सवाल किया था कि अरुण गोयल को चुनाव आयुक्त पद पर कैसे नियुक्ति की गई है। पीठ ने कहा था कि वह सिर्फ तंत्र को समझना चाहती है और देखना चाहती है कि कुछ 'हंकी पैंकी' तो नहीं हुई है। 

गौरतलब है कि याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने संविधान पीठ को बताया था कि उन्होंने ये मुद्दा उठाया था। इसके बाद एक सरकारी अफसर को वीआरएस देकर चुनाव आयुक्त नियुक्त कर दिया गया। बावजूद इसके कि पहले ही उन्होंने इसे लेकर अर्जी दाखिल कर रखी थी। पंजाब कैडर के आईएएस अधिकारी गोयल को 19 नवंबर को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था। फरवरी 2025 में मौजूदा सीईसी राजीव कुमार के कार्यालय छोड़ने के बाद गोयल अगले सीईसी बनने की कतार में होंगे। चुनाव आयोग में उनका कुल कार्यकाल पांच साल से अधिक का होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए परामर्श प्रक्रिया में सीजेआई को शामिल करने की भी बात कही है। ईसी और सीईसी की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम जैसी प्रणाली की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 23 नवंबर को कहा था कि ऐसा करने से चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा था कि वर्तमान में जो व्यवस्था है उसके तहत अगर केंद्र में कोई भी सत्ताधारी दल खुद को सत्ता में बनाए रखना चाहता है तो वह इस पद पर 'यस मैन' नियुक्त कर सकता है।

सरकार के तर्कों पर न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा था कि संस्थान की स्वतंत्रता को उस सीमा तक सुनिश्चित किया जाना चाहिए जिसके लिए प्रवेश स्तर पर नियुक्ति को स्कैन किया जा सके। केंद्र में प्रत्येक सत्तारूढ़ राजनीतिक दल खुद को सत्ता में बनाए रखना चाहता है। अब, हम जो करना चाहते हैं वह सीईसी की नियुक्ति के लिए परामर्श प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करना है। इस प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने से आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें