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Narcotics Case: सुप्रीम कोर्ट ने महिला की गिरफ्तारी को बताया पूरी तरह गैर-जरूरी, दी अंतरिम जमानत

Mon, 06 Mar 2023 07:57 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल में दर्ज मामले में पिछले साल दिसंबर में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टांसेस एक्ट (NDPS Act) के तहत आरोपी बनाई महिला को दी गई अंतरिम जमानत को बरकरार रखा।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मादक पदार्थ बरामदगी से संबंधित मामले में एक महिला की गिरफ्तारी को पूरी तरह से गैर-जरूरी और इंतहा की हद करार दिया। अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि तीन नाबालिग बच्चों के साथ महिला को हिरासत में लेते समय पुलिस ने अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया। शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल में दर्ज मामले में पिछले साल दिसंबर में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टांसेस एक्ट (NDPS Act) के तहत आरोपी बनाई महिला को दी गई अंतरिम जमानत को बरकरार रखा।

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बता दें, महिला के पास कथित तौर पर 'याबा' की 1,542 गोलियां बरामद की गई थीं। थाई भाषा में 'याबा' का अर्थ 'पागल दवा' है, यह मेथामफेटामाइन और कैफीन से बनती है और इसे टैबलेट के रूप में बेचा जाता है। इसका उत्पादन दक्षिण पूर्व और पूर्वी एशिया में होता है।
 
जस्टिस एसआर भट्ट और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा कि यह आरोप लगाया गया था कि 28 मई, 2022 को महिला एक कार में अपने पति के साथ यात्रा कर रही थी, तब उसके पति के पास से 'याबा' की 1,542 गोलियां बरामद की गईं। इसके बाद महिला, उसके पति और तीन नाबालिग बच्चों को हिरासत में लिया गया, जिसमें 16 महीने का बच्चा भी शामिल था।
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पीठ ने अपने एक मार्च के आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता (महिला) का किसी भी अपराध में शामिल होने का कोई पिछला इतिहास नहीं है। शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के पिछले साल नवंबर के आदेश को चुनौती देने वाली महिला की याचिका पर आदेश पारित किया। हाईकोर्ट ने उसे जमानत देने से इनकार कर दिया था।

हिरासत में लेते समय पुलिस ने दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया
शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार के वकील ने कहा था कि बच्चों को गिरफ्तार नहीं किया गया था, लेकिन इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि उन्हें मां से अलग नहीं किया जा सकता, उन्हें भी उसके साथ हिरासत में ले लिया गया। पीठ ने कहा कि अदालत की राय है कि प्रथम दृष्टया पुलिस अधिकारियों ने तीन नाबालिग बच्चों के साथ महिला याचिकाकर्ता को हिरासत में लेते समय अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया।

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