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Supreme Court: दिल्ली-NCR के प्रदूषण पर कोर्ट सख्त, CAQM से कहा- समस्या आने से पहले उठाएं कदम; मांगी रिपोर्ट

Mon, 03 Nov 2025 04:12 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) से विस्तृत हलफनामा मांगा है। अदालत ने कहा कि एजेंसियां सिर्फ प्रदूषण बढ़ने पर नहीं, बल्कि पहले से कदम उठाएं।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए सोमवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) से हलफनामा मांगा है। अदालत ने आयोग से पूछा कि अब तक प्रदूषण रोकने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि अधिकारी सिर्फ स्थिति बिगड़ने पर कदम न उठाएं, बल्कि पहले से ही तैयारी करें ताकि हालात गंभीर न हों।
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सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह, जो अदालत की एमिकस क्यूरी के रूप में सहायता कर रही हैं, ने कहा कि दीवाली के दौरान दिल्ली के कई एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन काम ही नहीं कर रहे थे। उन्होंने बताया कि 37 में से सिर्फ नौ स्टेशन ही लगातार सक्रिय थे। सिंह ने कहा कि अगर मॉनिटरिंग स्टेशन सही तरह से काम नहीं करेंगे, तो यह तय करना ही मुश्किल होगा कि कब ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ यानी ग्रैप लागू करना है।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आयोग को यह स्पष्ट करना होगा कि प्रदूषण को “गंभीर स्तर” तक पहुंचने से रोकने के लिए उसने कौन से कदम उठाए हैं। अदालत ने आदेश दिया कि सीएक्यूएम एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे जिसमें पहले से की जा रही और प्रस्तावित कार्रवाइयों का विवरण दिया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि एजेंसियों को सिर्फ “प्रतिक्रिया” देने के बजाय “पहले से तैयारी” करनी होगी।
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सरकार का जवाब और जिम्मेदारी
सीएक्यूएम की ओर से पेश वकील ने कहा कि प्रदूषण के आंकड़ों की निगरानी का काम केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का है। इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सभी एजेंसियां जल्द ही अपनी रिपोर्ट दाखिल करेंगी। कोर्ट ने याद दिलाया कि पहले भी उसने आदेश दिया था कि एजेंसियां केवल तब कार्रवाई न करें जब प्रदूषण बढ़ जाए, बल्कि समय रहते उसे रोकने के उपाय करें।

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उत्सवों और पर्यावरण में संतुलन जरूरी
गौरतलब है कि 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने दीवाली के दौरान दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखों की सीमित बिक्री और फोड़ने की अनुमति दी थी। अदालत ने कहा था कि पारंपरिक उत्सवों और पर्यावरणीय चिंताओं के बीच संतुलन जरूरी है। ग्रीन पटाखे सिर्फ 18 से 20 अक्तूबर के बीच बेचे जा सकते थे और उन्हें फोड़ने की अनुमति केवल तय समय में ही थी।

कोर्ट ने इसे ‘टेस्ट केस बेसिस’ पर दी गई छूट बताया था। साथ ही, अदालत ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को निर्देश दिया था कि वे 14 अक्तूबर से 25 अक्टूबर तक वायु गुणवत्ता की निगरानी करें और प्रत्येक दिन की रिपोर्ट दाखिल करें।

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