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Vivekananda Reddy Murder Case: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की जमानत पर लगाई रोक, हाईकोर्ट ने दिया था रिहाई का आदेश

Fri, 26 May 2023 06:55 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई 14 जुलाई के लिए स्थगित कर दी है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री वाई एस विवेकानंद रेड्डी की हत्या के आरोपी व्यक्ति को जमानत दी गई थी। न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई 14 जुलाई के लिए स्थगित कर दी है और कहा कि वह हाईकोर्ट के 27 अप्रैल के उस आदेश पर रोक लगा रही है जिसमें आरोपी टी गंगी रेड्डी उर्फ येरा गंगी रेड्डी को जमानत देने का आदेश दिया गया था।

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पीठ दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विवेकानंद रेड्डी की बेटी सुनीता नरेड्डी द्वारा दायर एक याचिका भी शामिल है, जिसमें टी गंगी रेड्डी को सशर्त जमानत देने के हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। पीठ ने कहा कि 14 जुलाई को फिर से सूचीबद्ध करें। अगली तारीख तक, उच्च न्यायालय द्वारा पारित 27 अप्रैल के आदेश के एक हिस्से पर रोक रहेगी।

इससे पहले बुधवार को सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) संजय जैन ने पीठ से कहा कि 'हमने ऐसा कभी नहीं सुना कि जमानत रद्द करने वाला आदेश जमानत की अनुमति देता है। यह कैसे संभव है? यह स्वाभाविक रूप से विरोधाभासी है। 
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याची सुनीता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि जमानत रद्द करने की स्थिति में जमानत कैसे दी जा सकती है। वहीं, आरोपियों की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि उन्होंने भी जमानत रद्द करने के हाईकोर्ट के 27 अप्रैल के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी।

तेलंगाना हाईकोर्ट ने दिया था यह आदेश 
तेलंगाना हाईकोर्ट ने 27 अप्रैल के अपने आदेश में कहा था कि आरोपी नंबर 1 (टी गंगी रेड्डी) को 5 मई, 2023 को या उससे पहले आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया जाता है। उसके आत्मसमर्पण करने पर उसे 30 जून, 2023 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाएगा। यह समयावधि सीबीआई द्वारा जांच पूरी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई बाहरी सीमा है। अदालत ने यह भी कहा था कि यदि आरोपी  पांच मई को या उससे पहले संबंधित अदालत के सामने आत्मसमर्पण नहीं करता है तो सीबीआई उसे कानून के तहत हिरासत में लेने और सीबीआई मामलों के प्रधान विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश करने के लिए स्वतंत्र है। और अगर आरोपी आत्मसमर्पण कर देता है तो अदालत को 1 जुलाई, 2023 को याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि आरोपी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतदारों के लाने पर जमानत पर रिहा किया जाए।

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