सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र समेत 17 राज्यों से कहा कि विशेष एनआईए अदालतों के माध्यम से यूएपीए मामलों के मुकदमों को एक साल के अंदर निपटाया जाए। कोर्ट ने प्रत्येक मामले की औसतन एक महीने में सुनवाई और समर्पित न्यायाधीश व विशेष लोक अभियोजक तैनात करने का निर्देश दिया।
आतंकवाद विरोधी मामलों में सख्ती दिखाते हुए सप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा निर्देश दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र समेत 17 राज्यों से कहा कि वे विशेष एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) अदालतों के माध्यम से यूएपीए यानी आतंकवाद विरोधी मामलों के मुकदमों को एक साल के अंदर निपटाने का प्रयास करें। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि अगर किसी राज्य में 10 या उससे अधिक एनआईए मामले लंबित हैं, तो वहां विशेष एनआईए अदालतें बनाई जाएं।
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इन राज्यों ने दी दलील, सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मामले में दिल्ली सरकार ने बताया कि यहां रॉस एवेन्यू कोर्ट परिसर के दूसरे तल पर 15 विशेष अदालतें शुरू की जाएंगी और एनआईए अदालतें अप्रैल 2026 तक संचालन के लिए तैयार होंगी। कर्नाटक और तमिलनाडु के अधिवक्ता जनरल ने बताया कि उनके राज्यों में 10 या उससे अधिक एनआईए मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कहा कि वे अपने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से सलाह कर अधिक से अधिक एनआईए अदालतें स्थापित करें और सुनिश्चित करें कि न्यायाधीश अन्य मामलों में व्यस्त न हों।