पीठ ने राज्यों को जांच बढ़ाने को उनका दायित्व करार दिया और कहा, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और अहमदाबाद में हर दिन कोविड-19 के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में राज्य जांच में कमी कैसे ला सकते हैं? जांच न करना इस समस्या का समाधान नहीं है। जांच बढ़ाना राज्यों का कर्त्तव्य है, ताकि लोग यह जान सकें कि उनके स्वास्थ्य की स्थिति कैसी है?
- कोरोना जांच से इनकार नहीं कर सकते राज्य
जस्टिस भूषण ने राज्यों से कहा कि अगर कोई व्यक्ति कोरोना टेस्ट का आग्रह करता है तो इस तकनीकी आधार पर उसे मना नहीं किया जा सकता है। उससे प्रक्रियाओं के बारे में बताना होगा, ताकि ज्यादा जांच की जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 के मरीजों का इलाज और शवों की बेकदरी पर गुरुवार को स्वत: संज्ञान लिया था। पूर्व कानून मंत्री और कांग्रेस नेता अश्विनी कुमार ने भी चीफ जस्टिस को पत्र लिखा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कोरोना मरीजों के साथ खराब बर्ताव किया जा रहा था और शवों से गलत तरीके से व्यवहार किया जा रहा है।
- परिजनों की जानकारी बिना ही कर दिया जा रहा अंतिम संस्कार
कोर्ट ने कहा, अस्पताल शवों के रखरखाव ठीक से नहीं कर रहे हैं और न ही परिजनों को उनके मरीजों की मौत के बारे में कोई जानकारी दे रहा हैं। इससे परिजन अपने सगे संबंधियों के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
- मरीजों की देखभाल पर राज्यों के मुख्य सचिवों से मांगी रिपोर्ट
पीठ ने कहा, केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। पीठ ने इन राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया कि वे मरीज प्रबंधन प्रणाली का ब्योरा जुटाएं और अस्पताल के कर्मचारियों और मरीजों की देखभाल के बारे में स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करें।