केंद्र ने राष्ट्रीय हाथी संरक्षण प्राधिकरण क्यों नहीं बनाया : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से हाथी गलियारों के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावित निकाय राष्ट्रीय हाथी संरक्षण प्राधिकरण (एनईसीए) को वैधानिक दर्जा देने पर 2010 की ‘गज रिपोर्ट’ में की गई सिफारिश पर जवाब देने को कहा है। वहीं, सरकार ने दावा किया कि वह हाथियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और बिजली के झटके सहित उनकी मौत को रोकने के लिए कई कदम उठाती रही है।
देश में हाथियों की संख्या 29,964 (2017 की गणना के अनुसार) तक पहुंच गई है। हाथियों के आवासों को पूरे भारत में समेकित किया जा रहा है। हाथी आरक्षित क्षेत्र को बढ़ा दिया गया है। कार्यकर्ता प्रेरणा सिंह बिंद्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ‘गज’ रिपोर्ट में यह सिफारिश की गई थी कि ‘प्रोजेक्ट एलिफेंट’ को एक वैधानिक एजेंसी में परिवर्तित किया जाए। पीठ ने सुझाव दिया कि संशोधन किया जा सकता है ताकि प्राधिकरण को वैधानिक दर्जा प्रदान किया जा सके। पीठ ने कहा कि टास्क फोर्स ने प्रस्तावित किया है कि नए निकाय को ‘राष्ट्रीय हाथी संरक्षण प्राधिकरण’ कहा जा सकता है।
पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को कार्यकर्ता प्रेरणा सिंह बिंद्रा की दायर जनहित याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। पीठ ने हाथियों के संरक्षण के संबंध में प्रासंगिक निर्देशों और दिशानिर्देशों की निगरानी और कार्यान्वयन के उद्देश्य से केंद्रीय परियोजना हाथी निगरानी समिति की स्थापना पर स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है। शीर्ष अदालत ने मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि हाथियों के बिजली के झटके से बचने के लिए संरक्षित क्षेत्रों के निरीक्षण की सुविधा के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।