सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया से अलग हुई पत्नी को भी तलाकशुदा पत्नी की तरह गुजारा भत्ते का हक है और इससे उसे वंचित रखने का कोई कारण नहीं हो सकता। शीर्ष अदालत ने 2014 में पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली एक महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह कहा है। हाईकोर्ट ने महिला के पति की ओर से दायर याचिका पर यह फैसला दिया था। इसमें उन्होंने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें उसे महिला को गुजारे भत्ता के लिए हर महीने 4,000 रुपये देने का आदेश दिया गया था।
लेकिन शीर्ष अदालत में जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए मामले को नए सिरे से विचार के लिए वापस कर दिया। शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान पति के वकील ने दलील दी कि महिला गुजारा भत्ते की हकदार नहीं है और न्यायिक प्रक्रिया से अलग हुए मामले पर पहले भी ऐसा ही फैसला आया है।
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