रामपुर के शिशु सदन में फ्रेंच मां के साथ बच्ची गुनगुन।
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उत्तर प्रदेश के मेरठ में बस स्टैंड पर लवारिस हालत में मिली गुनगुन को अब फ्रेंच मॉम की गोद मिलेगी। उसे फ्रांस के पेरिस शहर के दंपत्ति ने गोद ले लिया है। साल भर की कवायद के बाद अब उसे फ्रांस ले जाने की तैयारी की जा रही है।
नए माता पिता मिलने के बाद आठ साल की बच्ची काफी खुश है, वहीं फ्रांसीसी दंपति भी बेहद खुश नजर आ रहे हैं। वर्ष 2012 में मेरठ के बस स्टैंड के फुटपाथ पर एक तीन साल की लवारिस बच्ची मिली थी, जिसके बाद इस बच्ची को पहले मेरठ और फिर रामपुर के राजकीय शिशु सदन लाया गया।
राजकीय शिशु सदन में इस बच्ची को गुनगुन नाम दे दिया गया। गुनगुन समय के साथ आठ साल की हो गई। अब उसकी किस्मत का सितारा चमक गया है। लवारिस हालत में मिली गुनगुन को अब अब मां का आंचल मिल गया, साथ ही पिता का साया भी। माता पिता फ्रांसीसी हैं।
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और गुनगुन बन गई बेबी जुडाइसा
फ्रांस के पेरिस शहर में रहने वाले शौन कौनवे अपनी पत्नी के संग रामपुर राजकीय शिशु सदन पहुंचे, जहां पर पूरी प्रक्रिया करने के बाद इस दंपति ने आठ साल की गुनगुन को अपनी बेटी के रूप में गोद ले लिया। उन्होंने गुनगुन का नाम भी बदलकर बेबी जुडाइसा रख लिया।
पेरिस में विज्ञापन एजेंसी में मैनेजर के पद पर तैनात कौनवे और उनकी पत्नी पीटर कौनवे के हवाले इस बच्ची को कर दिया गया है। शिशु सदन में रहने वाले बच्चों को गोद लेने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फ्रेंच दत्तक ग्रहण संस्था (आफा) के माध्यम से इस बच्ची को गोद लेने की प्रक्रिया साल भर पहले शुरू हुई थी।
पिछले माह स्थानीय अदालत में इस बच्ची को गोद लेने की प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया था। कोर्ट के आदेश पर राजकीय शिशु सदन ने बुधवार को इस बच्ची को फ्रांस दंपति के हवाले कर दिया। अब उसे पेरिस ले जाया जाएगा। बेटी मिलने के बाद फ्रांसीसी दंपति भी काफी खुश हैं।
17 बार रिजेक्ट होने के बाद मिले फ्रांसीसी माता पिता
राजकीय शिशु सदन रामपुर के प्रभारी अधीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि केंद्रीय दत्तक संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) की बेवसाइट पर दिखाया गया कि गुनगुन का नाम 17 बार इस बेवसाइट से लोगों ने रिजेक्ट किया,जिसके बाद बच्चों को गोद देने वाली अंतरराष्ट्रीय बेवसाइट पर इसका नाम डाल दिया गया। इसके बाद यह बच्ची फ्रांसीसी दंपति को पंसद आ गई।
वहीं, अमरोहा में कूड़े के ढेर पर मिली आठ दिन की बच्ची रामपुर लाई गई है। आठ दिन की इस बच्ची को सदन में महक नाम दिया गया है, लेकिन इसकी हालत ठीक नहीं है, जिसकी वजह से उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसका सदन प्रशासन की ओर से इलाज कराया जा रहा है। गुनगुन को परिवार मिलने के बाद महक सहित कई लावारिस बच्चियों को भी मां की गोद मिलने का इंतजार है।