सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग की बेसहारा विधवाओं से वृंदावन सहित अन्य आश्रय गृहों में अच्छा सलूक नहीं होता है। उनकी स्थिति बहुत दयनीय है। इन विधवाओं की स्थिति को लेकर आईं रिपोर्ट पर गौर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने विधवा विवाह को बढ़ावा देने को सकारात्मक कदम बताया है। इस तरह के प्रयास से रूढ़िवादी सोच खत्म हो सकती है।
पीठ ने कमेटी का गठन करते हुए निराश्रित विधवाओं के संबंध में जारी रिपोट पर गौर करने करने का निर्देश दिया है। कमेटी को 30 नवंबर तक विधवाओं के उत्थान को लेकर कार्य योजना तैयार करने के लिए कहा है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी में सुनीता धर, मीरा कुमारी, आभा सहगल, वकील अपराजिता सिंह और हेल्पेज इंडिया और सुलभ इंटरनेशनल के एक-एक प्रतिनिधि शामिल हैं। शीर्ष अदालत ने कहा है कि संवैधानिक दायित्व होने के नाते हमारा इस मामले में दखल देना जरूरी है, जिससे कि असहाय विधवाओं को उनकी आवाज मिल सके।
पीठ ने कहा कि असहाय विधवाओं को भी सम्मान से जीने का अधिकार है। पीठ ने कहा कि इन रिपोर्टों में विधवा विवाह को प्रोत्साहित करने की बात नहीं है, लेकिन हमारा मानना है कि इस तरह का प्रयास किया जाना चाहिए।
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि जनहित याचिकाओं का मकसद सिर्फ सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को लाभ पहुंचाना नहीं है, बल्कि सामाजिक रूप से असमर्थ लोगों को भी सशक्त करना है। वृंदावन सहित अन्य जगहों में रह रही विधवाएं इसी श्रेणी में आती हैं।