सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र, त्रिपुरा और कर्नाटक में कोरोना के इलाज में जुटे डॉक्टर व अन्य मेडिकल स्टाफ को समय पर वेतन मिले। इन राज्यों पर आरोप लगा है कि ये डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ को वक्त पर वेतन नहीं दे रहे हैं।
जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने शुक्रवार को केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ऐसा कतई नहीं है कि सरकार नि:सहाय है। हमारे 17 जून के आदेश को पढ़ा जाना चाहिए और उसका अनुपालन किया जाना चाहिए। कोर्ट ने सरकार को याद दिलाया कि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत उसे अधिकार मिला हुआ है।
इस दौरान पीठ को जानकारी दी गई कि ड्यूटी करने के बाद आवश्यक रूप से डॉक्टर व मेडिकल स्टाफ को क्वारंटीन में भेजा जाता है। लेकिन कई जगहों पर क्वारंटीन अवधि का वेतन काटा जा रहा है। इस पर पीठ ने मेहता से पूछा कि आखिर यह माजरा क्या है? ऐसा क्यों हो रहा है? जवाब में मेहता ने कहा, वह इस मसले को देखेंगे और यह प्रयास करेंगे कि क्वारंटीन अवधि को ड्यूटी का हिस्सा माना जाए।
यूनाइटेड रेसिडेंट एंड डॉक्टर एसोसिएशन (यूआरडीए) ने याचिका दायर कर कहा था कि कई राज डॉक्टरों को वेतन नहीं दे रहे हैं। वहीं मुख्य याचिकाकर्ता डॉक्टर आरुषि जैन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील केवी विश्वनाथन ने कहा, अदालती आदेश के बावजूद कई जगहों पर डॉक्टरों को नियमित रूप से वेतन नहीं दिया जा रहा है। शीर्ष कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 10 अगस्त को करेगा।