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SC: सूखा-प्रभावित क्षेत्रों की वित्तीय मदद का मसला खुद सुलझाएं केंद्र-कर्नाटक सरकार, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

Tue, 10 Dec 2024 01:14 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कर्नाटक सरकार की याचिका में मांग की है कि केंद्र का उसे एनडीआरएफ के जरिए सूखा प्रबंधन के लिए मांगी गई पूरी धनराशि मुहैया न कराना प्रथम दृष्टया राज्य के लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कर्नाक में सूखा प्रभावित क्षेत्रों को वित्तीय मदद मुहैया कराने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई की। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ)  वित्तीय सहायता से जुड़े इस मसले को केंद्र और कर्नाटक सरकार को खुद ही सुलझाना चाहिए। 
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केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकरमाणी ने जस्टिस बीआर गवाई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच से अपील की कि उन्हें इस मामले में हलफनामा दायर करने के लिए और समय चाहिए। इस पर बेंच ने कहा कि यह मामला आप खुद ही सुलझाएं। 

गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार ने सूखा प्रबंधन के लिए याचिका डालकर मांग की है कि सर्वोच्च न्यायालय केंद्र को एनडीआरएफ के जरिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता प्रदान करने का निर्देश दे। इस पर सुनवाई के दौरान बेंच ने पूछा कि अब तक कितने फंड्स दिए गए हैं। इस पर कर्नाटक सरकार की तरफ से पेश वकील ने कहा कि राज्य सरकार ने 18 हजार 171 करोड़ रुपये की सहायता की मांग की थी। लेकिन अब तक 3819 करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर जनवरी में सुनवाई करेगा। इससे पहले 29 अप्रैल को केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा था कि उसने कर्नाटक सरकार को सूखा प्रबंधन के लिए 3400 करोड़ रुपये दिए हैं। 

कर्नाटक सरकार की याचिका में क्या मांग?
कर्नाटक सरकार की याचिका में मांग की है कि केंद्र का उसे एनडीआरएफ के जरिए सूखा प्रबंधन के लिए मांगी गई पूरी धनराशि मुहैया न कराना प्रथम दृष्टया राज्य के लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। संविधान अनुच्छेद 14 व अनुच्छेद 21 के जरिए इन अधिकारों की रक्षा की गारंटी देता है। 

याचिका में कहा गया है कि कर्नाटक भीषण सूखे से जूझ रहा है, जिसका 2023 के खरीफ सीजन (जून-सितंबर) के दौरान राज्य के लोगों के जीवन पर असर पड़ा है। राज्य सरकार के मुताबिक, 236 में से 223 तालुक सूखे से प्रभावित हैं। इनमें से 196 तालुक भीषण रूप से सूखा प्रबावित घोषित हैं, जबकि 27 तालुक मध्यम रूप से प्रभावित हैं।
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