आम्रपाली बिल्डर्स के विभिन्न प्रोजेक्टों में बिक्री से बचे करीब 5229 फ्लैट बेचने के लिए कवायद शुरू की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनबीसीसी) को इसकी योजना पेश करने का आदेश दिया है। आम्रपाली के प्रोजेक्टों में घर खरीद चुके लोगों से भी इस बारे में सुझाव मांगे गए हैं।
जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने बुधवार को लोन के जरिए घर खरीदने वाले लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए छह बैंकों बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, कॉरपोरेशन बैंक, सिंडिकेट बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र को भी नोटिस जारी किया। बैंकों से घर खरीदारों के लंबित होम लोन जारी करने का तरीका पूछा गया है ताकि घर खरीदार बकाया रकम का भुगतान कर सके। दरअसल सुनवाई के दौरान पीठ के सामने यह बात आई थी कि बैंक बकाया रकम का भुगतान करने के लिए लोन का बचा हिस्सा जारी नहीं कर रहे हैं। पीठ ने सरकार से भी घर की रजिस्ट्री के वक्त खरीदारों से जीएसटी व सेवा कर लेने की प्रक्रिया की जानकारी मांगी है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने भुवनेश्वर और रायपुर के राजस्व अधिकारी को नोटिस जारी कर पूछा है कि आम्रपाली ने जमीन खरीदने के लिए कितने पैसे जमा कराए थे।
हर्टबीट सिटी व ओ 2 वैली का भी होगा फोरेंसिक ऑडिट
शीर्ष अदालत ने फोरेंसिक ऑडिटरों पवन अग्रवाल व रवि भाटिया को आम्रपाली समूह के शेष बचे दो प्रोजेक्ट हर्टबीट सिटी और ओ2 वैली का भी ऑडिट करने का आदेश दिया। इन दोनों प्रोजेक्टों का पंजीकरण शीर्ष अदालत ने अनियमितताओं की जांच के लिए रेरा अधिनियम के तहत 30 सितंबर तक रद्द घोषित कर रखा है।
रॉयल गोल्फ लिंक सिटी प्रोजेक्ट को भी दी राहत
शीर्ष अदालत ने ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली समूह के प्रीमियर प्रोजेक्ट रॉयल गोल्फ लिंक सिटी को भी राहत दी। पीठ ने निर्देश दिया कि 10 जनवरी तक 66 करोड़ रुपये जमा कराए जाने पर इस प्रोजेक्ट की 50 फीसदी संपत्तियों पर से रोक हटा ली जाएगी। बता दें कि इस साल फरवरी में शीर्ष अदालत ने इस प्रोजेक्ट के 30 विला अटैच कर दिए थे, जिनका निर्माण संदिग्ध लेनदेन की बदौलत होने की बात मानी गई थी।