सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि पीजी मेडिकल और डेंटल कोर्स में किसी भी शैक्षणिक सत्र में एनआरआई कोटे का प्रावधान ऐसा नहीं है कि इसे बदला नहीं जा सकता। कोर्ट ने कहा, निजी मेडिकल कॉलेज दाखिले के लिए ऐसी सीटें निर्धारित करने के लिए बाध्य नहीं हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा- एनआरआई कोटे का प्रावधान ऐसा नहीं जिसे बदला न जा सके
जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने कहा, यदि कॉलेज या संस्थान या प्रदेश नियामक प्राधिकरण ऐसे कोटे को खत्म करने का फैसला लेते हैं तो उन्हें इसका उचित नोटिस जारी करना चाहिए ताकि ऐसी सीटों पर प्रवेश के इच्छुक छात्र अन्य विकल्प चुन सकें।
पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें कहा गया था कि निजी मेडिकल कॉलेज कुल सीटों का 15 फीसदी एनआरआई कोटे के लिए निर्धारित करने को बाध्य नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में पीए इमानदार बनाम महाराष्ट्र सरकार मामले में सात जजों की पीठ के फैसले का जिक्र करते हुए कहा, 15 फीसदी एनआरआई कोटा अनिवार्य नहीं था बल्कि संभावित था। ऐसे में यह न तो अपरिवर्तनीय है और न अनुल्लंघनीय।